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सोमवार, 31 मार्च 2014

अब इंटरनेट पर घर के राशन का ऑर्डर

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शॉपिंग का तरीका बदल चुका है. अब लोग दुकानों में जा कर वक्त बर्बाद करने की जगह इंटरनेट पर ही ऑर्डर देना पसंद करते हैं. कपड़े और फर्नीचर तक तो ठीक है, पर क्या अब घर का राशन भी इंटरनेट से ही आया करेगा?



कुछ लोग हफ्ते भर की सब्जी एक साथ खरीदना पसंद करते हैं, पर अधिकतर को रोज ताजा सामान लेने में ही तसल्ली महसूस होती है. सब्जी ताजा है या नहीं, कहीं कीड़ा तो नहीं लगा, फल की खुशबू अच्छी है जा नहीं, ये सब बातें सुनिश्चित करने के बाद ही लोग सामान खरीदते हैं. जब तक फल को खुद अपने हाथ में ले कर तसल्ली ना कर लें, तब तक भले ही दुकानदार जितना भी समझा ले, लोग खरीदने के लिए राजी नहीं होते. लेकिन हो सकता है कि कुछ वक्त में यह बदल जाए.
अमेजन जैसी इंटरनेट वेबसाइटों पर अब खाने पीने का सामान खरीदने का भी मौका मिलने लगा है. हालांकि अभी ऑनलाइन फूड का बाजार पक्का नहीं हुआ है लेकिन उम्मीद की जा रही है कि आने वाले कुछ सालों में इसमें तेजी से उछाल दर्ज किया जाएगा. अमेरिका में इस तरह की कई वेबसाइटों का परीक्षण चल रहा हैं. जर्मनी में भी अब इस तरह का बाजार शुरू हो रहा है. यहां के जानेमाने स्टोर 'रेवे' ने अपनी ऑनलाइन टीम भी तैयार कर ली है. रेवे के सीईओ का कहना है कि उन्होंने जर्मनी में ही अपनी छोटी सी 'सिलिकॉन वैली' बना ली है
राशन की होम डिलीवरी
इंटरनेट के जानकारों की मानें तो 2020 तक ऑनलाइन फूड इंडस्ट्री पूरी तरह फल फूल चुकी होगी. अकेले जर्मनी में इसके सालाना दो से तीन अरब यूरो के मुनाफे की उम्मीद की जा रही है. इंग्लैंड में तो ऑनलाइन कंपनी टेस्को ने 2013 में ही 15 करोड़ यूरो का मुनाफा दर्ज किया है. फ्रांस में भी कई स्टोर इस कंसेप्ट पर काम कर रहे हैं. वहां लोग इंटनेट में राशन का सामान ऑर्डर कर सकते हैं. दिक्कत बस इतनी है कि अभी वहां इस सामान की डिलीवरी का विकल्प नहीं है. यानि स्टोर से सामान उठाने खुद ही जाना होगा. फायदा इतना है कि आपको लंबी कतार में लगने की जरूरत नहीं और आपके पहुंचते ही आपकी पसंद का सारा सामान पहले से ही पैक हो कर आपका इंतजार कर रहा होगा.साथ ही कुछ ऐसी कंपनियां भी बाजार में आने की कोशिश में हैं जिनके कोई स्टोर हैं ही नहीं. 'ऑलयूनीड.कॉम' और 'फूड.डीई' इसी तरह की वेबसाइटें हैं. ये ग्राहकों तक सामान डिलीवर करने का वादा भी करती हैं. इन कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है खाने पीने के सामान को सही ढंग से ग्राहकों तक पहुंचाना. मसलनदूध, अंडे, मांस और अन्य कोल्ड स्टोरेज का सामान उसी हालत में ग्राहकों तक पहुंचना चाहिए जैसा कि आम तौर पर स्टोर में मिलता है. हो सकता है कि इस तरह की डिलीवरी के लिए कंपनी को ज्यादा खर्च उठाना पड़े. पर एक बात तो तय है, ग्राहक तभी इंटरनेट में ऑर्डर करना पसंद करेंगे अगर उन्हें स्टोर जितनी या उससे भी कम कीमत में सामान मिलता है. sabhar :http://www.dw.de/


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इंसानों से बातें करने वाला रोबोट करेगा अंतरिक्ष की सैर

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टोक्यो। अमेरिका और रूस के बाद जापान की अंतरिक्ष में एक नया मुकाम हासिल करने की तैयारी है। एशियाई देश चार अगस्त को इंसानों से बेधड़क बातें करने वाले रोबोट को अपने एक अंतरिक्ष यात्री के साथ अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन भेजेगा। किरोबो नाम के इस मशीनी एस्ट्रोनॉट की अंतरिक्ष यात्रा पहला ऐसा मौका होगा, जब धरती से बाहर इंसान और रोबोट के बीच संवाद होगा।
जापान के दक्षिण-पश्चिम स्थित तानीगाशिमा अंतरिक्ष केंद्र से चार अगस्त को किरोबो, कौउनोत्री-4 स्पेसक्राफ्ट के जरिये अंतरिक्ष स्टेशन रवाना होगा। जापानी अंतरिक्ष यात्री कोइची वाकाता भी इस मिशन का हिस्सा होंगे। वाकाता वहां स्पेस स्टेशन की कमान की जिम्मेदारी संभालने वाले पहले जापानी होंगे।
34 सेमी और एक किलो के नन्हे किरोबो को यह नाम जापानी शब्द किबो (आशा) और रोबोट को जोड़कर दिया गया। जापानी डेली प्रेस के मुताबिक, बुधवार को पत्रकारों से रूबरू हुए किरोबो ने तमाम सवालों का बखूबी जवाब दिया। लांचिंग के पहले शून्य गुरुत्व में रहने समेत किरोबो अंतरिक्ष में काम करने के लिए जरूरी इम्तहान पास कर चुका है।
किरोबो से पूछा गया कि उसका सपना क्या है? उसने कहा, वह ऐसे भविष्य की उम्मीद करता है, जहां इंसान और रोबोट एक साथ रहें और कंधे से कंधा मिलाकर काम करें। टोक्यो यूनिवर्सिटी, टोयोटा और डेंट्सू इंक ने मिलकर तैयार किया है। टोक्यो विवि में प्रोफेसर तोमोतोका ताकाहाशी ने कहा कि किरोबो अंतरिक्ष यात्रियों की मदद करेगा, वहीं उसका हमशक्ल रोबोट मिराता नीचे कंट्रोल रूम में जिम्मेदारी संभालेगा। वैज्ञानिकों का मुख्य लक्ष्य किरोबो और अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के बीच संवाद पर होगा। उनका कहना है कि एंड्रायड सिस्टम पर बना किरोबो जब स्पेस स्टेशन पर वाकाता से मिलेगा तो उसे पहचान लेगा। उसे पिछली बातें भी याद रहती हैं। sabhar :http://www.jagran.com/

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भटकती आत्मा का रहस्य

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25 सालों से किसकी आत्मा भटकती है इस चॉल में?

चॉल के आस-पास भटकता है भूत




चॉल के आस-पास भटकता है भूत


भूत प्रेतों के बारे में यह कहा जाता है कि यह सुनसान जगहों पर रहते हैं। लेकिन घटना को पढ़कर आपका यह भ्रम दूर हो जाएगा। क्योंकि यह भूत सुनसान में नहीं बल्कि एक चॉल के आस-पास भटकता है जहां दिन भर लोगों की चहल-पहल बनी रहती है।

मुंबई का भूतहा चॉल

मुंबई का भूतहा चॉल

यह चॉल है मायानगरी मुंबई में माहिम के कैनोसा प्राइमरी स्कूल के पास स्थित डिसूजा चॉल। कहा जाता है कि इस चॉल के आस-पास एक भूतनी की आत्मा भटकती है।

कौन है यह भूतनी

यह भूतनी करीब 25 साल पहले इसी चॉल में रहती थी। एक रात कुएं से पानी लेने के लिए जब आई तो गलती से कुएं में गिर गई। और कुएं में डूबकर इसकी मौत हो गई। अब इस कुएं को बंद कर दिया गया है।

जब दिख जाती है यह भूतनी

कहते हैं रात के समय जब भी कोई इस कुएं के आस-पास से गुजरता है तो उसे भूतनी दिख जाती है। लेकिन यह किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती है। चॉल मालिक रिचर्ड हर दिन कुएं के पास फल और फूल चढ़ाते हैं ताकि आत्मा शांत रहे।

ममी का रहस्यः मरने के बाद भी बढ़ रहे हैं नाखून और बाल


जिंदा है या मुर्दा बढ़ रहे हैं नाखून और बाल

मरने के बाद भी किसी व्यक्ति के नाखून और बाल बढ़ रहें हों यह सुनकर आप एक बार चौंक जरुर जाएंगे। वह भी तब जबकि, उस व्यक्ति की मौत करीब 550 साल पहले हो चुकी हो। लेकिन चौंकाने वाला यह रहस्य भारत के ही हिमाचल राज्य में मौजूद है।

किसकी है यह ममी

किसकी है यह ममी

स्थानीय लोग इस ममी के प्रति अपार श्रद्घा रखते हैं। कहते हैं कि यह ममी एक साधु की है। कहते हैं उन दिनों इस गांव में बिच्छूओं का आतंक था। साधु ने गांव वालें से कहा कि आप लोग मुझे जमीन में दफना दो। इससे बिच्छूओं का आतंक खत्म हो जाएगा।

गीयू में 550 साल पुरानी ममी

हिमाचल के स्पीती जिले के गांव गीयू में 550 साल पुरानी एक ममी है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस ममी के बाल और नाखून बढ़ते रहते हैं। हालांकि चिकित्सा विज्ञान इस सच से इंकार करता है।

कैसे मिली यह ममी

कैसे मिली यह ममी

साधु की बात मानकर गांव वालों ने साधु को जमीन में दफना दिया। इसके बाद बिच्छू गायब हो गए। साधु का भी कुछ पता नहीं चला। इंडो तिब्बतियन बोर्डर पुलिस द्वारा की जा रही खुदाई में यह ममी प्राप्त हुई। इसके बाद से ममी को संभलकर रखा गया है और लोग इसकी पूजा करते हैं।

कहते हैं भारत के इस चर्च में तीन भूतों का बसेरा है

चर्च में ही अपना घर बनाए बैठे हैं भूत

चर्च में ही अपना घर बनाए बैठे हैं भूत

आपने सुना होगा कि भूत प्रेत भगवान से डरते हैं। जहां पर ईश्वर का ध्यान किया जाता है उस जगह के आस-पास भूत भटकने का साहस भी नहीं कर पाते हैं।

लेकिन तीन ऐसे भूत हैं जो बेखौफ चर्च में ही अपना घर बनाए बैठे हैं। यह चर्च भारत के गोवा शहर में स्थित है। अगर आप गोवा घूमने गए होंगे तो शायद आपने इस चर्च के दर्शन भी किए होंगे।

राजाओं की आत्मा भटकती है

गोवा स्थित इस चर्च का नाम है थ्री किंग्स चर्च। लोगों का मानना है कि इस चर्च में तीन राजाओं की आत्मा भटकती है। और कई बार चर्च में आए लोगों को इनकी मौजूदगी का एहसास भी होता है।

इस तरह तीनों राजा बन गए भूत

यहां के कुछ लोग बात बताते हैं कि किसी समय यहां तीन पुर्तगाली राजा हुआ करते थे। इनमें वर्चस्व को लेकर अक्सर लड़ाई होती रहती थी। एक बार होल्गेर नाम के एक राजा ने अन्य दोनों राजाओं को इस चर्च में आमंत्रित किया और धोखे से जहर देकर मार दिया।

जब लोगों को होल्गेर की इस करतूत का पता चला तो इनके महल को घेर लिया। जनता के आक्रोश को देखकर तीसरे राजा ने आत्महत्या कर ली। तीनों राजाओं के शव को इसी चर्च में दफना दिया गया। इसके बाद से ही इस चर्च में भूतों का निवास माना जाता है।

sabhar :http://www.amarujala.com/


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इन फोटोशूट में जरा भी नहीं शरमाईं पूनम पांडेय?

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 poonam pandey bold pics

यदि सिर्फ एक फिल्म करने के बावजूद यदि पूनम चर्चाओं में हैं तो उसकी बड़ी वजह उनके फोटोशूट रहे हैं।
 poonam pandey bold pics


वह इन फोटोशूट को जब तक अपनी फेसबुक और ट्वीटर के माध्यम से दुनिया को दिखाती रही हैं।

 poonam pandey bold pics


पूनम पांडेय की इस फिल्‍म ने खूब सुर्खियां बटोरी


वह इन फोटो
 poonam pandey bold pics

पूनम पांडेय की सिर्फ एक फिल्म नशा रिलीज हुई है। वह फिल्‍म औसत रही है।

 poonam pandey bold pics

पूनम पांडेय हमेशा अपने फोटोशूट के माध्यम से चर्चाओं में रही हैं।

 poonam pandey bold pics


 poonam pandey bold pics
यह सवाल हमेशा रहा है कि पूनम पांडेय ऐसे फोटोशूट करते समय क्या जरा भी नहीं शरमाईं।


 poonam pandey bold pics



पूनम पांडेय की इधर कोई फिल्म नहीं है लेकिन फिर भी वह इन्हीं दृश्यों की वजह से चर्चाओं में रहीं हैं

sabhar :http://www.amarujala.com/
शूट को जब पूनम पांडेय की इधर कोई फिल्म नहीं है लेकिन फिर भी वह इन्हीं दृश्यों की वजह से चर्चाओं में रहीं हैंतक अपनी फेसबुक और ट्वीटर के माध्यम से दुनिया को दिखाती रही हैं।

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रविवार, 30 मार्च 2014

जवानी में ही बूढ़ा बना देगी डाइट से जुड़ी यह गलती

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having much salt can make you age earlier

कम उम्र में ही 'बूढ़ें' न दिखें, इसके लिए जरूरी है कि आप अपनी डाइट से जुड़ी एक गलत आदत तो बदल ही लें। 

हाल में हुए शोध की मानें तो खाने में अधिक नमक लेने वाले लोगों को कम उम्र में ही बुढ़ापे से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।जॉर्जिया रीजेंट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की मानें तो नमक में सोडियम की मात्रा अधिक होती है जो शरीर की कोशिकाओं को जल्दी नष्ट करती हैं।

शोधकर्ताओं ने यह भी दावा किया है कि यह रिस्क उन युवाओं को अधिक है जो कम उम्र में मोटापे का शिकार हो जाते हैं। उन्होंने यह भी माना कि भोजन में नमक की मात्रा कम करके इस खतरे से बचा जा सकता है।

शोध के दौरान 14 से लेकर 18 साल के 766 किशोरों को अलग-अलग समूहों में विभाजित कर, उनके खानपान का अध्ययन किया गया है।

यह शोध अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के एपिडेमोलॉजी एंड प्रिवेंशन न्यूट्रिशन के सम्मेलन में पेश किया गया है। sabhar :http://www.amarujala.com/

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ये रेस्तरां है खास, यहां बंदर हैं 'वेटर'

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जापान की राजधानी टोकियो में एक ऐसा रेस्तरां है जहां का मेनू ही नहीं बल्कि वेटर भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं. दो बंदर मेहमानों का स्वागत करते हैं. ये बंदर आम वेटरों की तरह ही आगन्तुकों को न सिर्फ मेनू लाकर देते हैं बल्कि ऑर्डर लेते हैं और खाना भी सर्व करते हैं. ये बंदर बिल्कुल आम वेटरों की तरह ही यूनिफार्म भी पहनते हैं, लेकिन इन बंदरों ने मुखौटे और विग पहने होते हैं. वे लोगों की बात भी समझ लेते हैं. रेस्तरां के मालिक ने बताया है कि रेस्तरां में इन जानवरों का उपयोग करने का विचार उसे तब आया जब उसने देखा कि उसके घर में उसकी पसंदीदा बंदरिया वैसी ही हरकतें करती है जैसी कि घर का मालिक करता है.
sabhar :http://www.samaylive.com/

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अब सिंथेटिक क्रोमोसोम तैयार

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ख़मीर क्रोमोसोम

जैविक इंजीनियरिंग में एक बड़ी छलांग लगाते हुए वैज्ञानिकों ने ख़मीर का पहला सिंथेटिक गुणसूत्र (क्रोमोसोम) तैयार किया है.
इससे पहले अब तक सिंथेटिक डीएनए बैक्टीरिया जैसे सरल जीवों के लिए बनाया गया था.

इसलिए ख़मीर के पहले 16 गुणसूत्रों को तैयार करना उभरते हुए सिंथेटिक बायोलॉजी विज्ञान की 'बड़ी उपलब्धि' मानी जा रही है.ख़मीर की जीवन रचना ऐसी है जिसकी कोशिकाओं का एक केंद्र होता है, जो पौधों और जानवरों से मिलता जुलता है. इसमें 2,000 जीन्स होते हैं.
शोध में ख़मीर में मौजूद मूल गुणसूत्रों को सिंथेटिक गुणसूत्रों से बदल दिया गया. वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किया गया गुणसूत्र ख़मीर में सफलतापूर्वक काम करने लगा.
इसके बाद वैज्ञानिकों ने ख़मीर के पुनरुत्पादन का भी निरीक्षण किया ताकि इसे व्यवहारिकता की कसौटी पर कसा जा सके.

'अप्रत्यक्ष खतरे'

शोध के लिए ख़मीर का प्रयोग बहुत उपयोगी माना जाता है. बेकिंग और मद्यकरण में ख़मीर का बड़े स्तर पर इस्तेमाल होता है और भविष्य में इसके औद्योगिक इस्तेमाल की भी बहुत संभावनाएं हैं.
कैलिफ़ोर्निया में एक कंपनी पहले भी सिंथेटिक बायोलॉजी की मदद से ख़मीर की ऐसी किस्म तैयार कर चुकी है जो मलेरिया की दवा का एक तत्व, आर्टेमिसिनिन पैदा कर सकती है.
ख़मीर क्रोमोसोम
ख़मीर में गुणसूत्र-lll का संश्लेषण एक अंतर्राष्ट्रीय टीम द्वारा किया गया. बाद में इसके परिणामों को साइंस जर्नल में प्रकाशित भी किया गया. (ख़मीर के गुणसूत्रों का नाम सामान्यतः रोमन अंकों पर रखा जाता है.)
शोध में वैज्ञानिकों की टीम की अगुवाई करने वाले, लैनगोन मेडिकल सेंटर न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के डॉक्टर जेफ़ बोएके का कहना है, "इससे सिंथेटिक बायोलॉजी की सुई सिद्धांत से हक़ीक़त की ओर बढ़ी है."
बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि शोध का परिणाम सच में रोमांचक है. उन्होंने कहा, "जिस हद तक हमने अनुक्रम बदले उसके बाद भी अंत में हमने स्वस्थ और खुश ख़मीर पाया."
नए गुणसूत्र को सिन-lll नाम दिया गया है. इसे बनाने में 273,871 डीएनए जोड़ों का इस्तेमाल किया गया है, जो ख़मीर के शरीर के मूल गुणसूत्र में मौजूद 316,667 डीएनए से थोड़ा कम है.
डॉक्टर बोएके ने बताया, "हमने उसके शरीर में 50 हज़ार से अधिक डीएनए कोड को बदल दिया था. इसके बावज़ूद ख़मीर न केवल साहसी निकला बल्कि उसने नए तरह के काम करने भी शुरू कर दिए. नए काम करने की तरक़ीब हमने उसके गुणसूत्र में मशीन की मदद से सिखाया."
ख़मीर के अंदर आए नए बदलाव का कारण रसायनिक परिवर्तन है, जिससे वैज्ञानिक उसके गुणसूत्रों में हज़ारों तरह की भिन्नता ला सकते हैं, जो जेनिटिक कोड को बदलने में मददगार होगा.
उम्मीद है कि ख़मीर के सिंथेटिक गुणसूत्रों की मदद से इसका प्रयोग उपयोगी टीकों और जीव ईंधन को बनाने में किया जा सकेगा.
आनुवांशिक संशोधन में एक जीव से दूसरे जीव के अंदर जीन को स्थानान्तरित किया जाता है, वहीं सिंथेटिक जीव विज्ञान में नए जीन का निर्माण किया जाता है.
मगर विज्ञान जगत से बाहर कुछ लोगों का मानना है कि इस शोध से वैज्ञानिक भगवान बनने की कोशिश कर रहे हैं. साथ ही वह इसके दूरगामी दुष्प्रभावों को नजरअंदाज़ कर रहे हैं.

ल्योड्स इंश्योरेंस बाज़ार ने 2009 में अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि नई तकनीक के खतरे अप्रत्यत्क्ष होते हैं.

sabhar :http://www.bbc.co.uk/

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प्लेन से खींची तस्वीर में दिखे हैरान आदिवासी, इन्होंने पहले कभी नहीं देखा विमान

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प्लेन से खींची तस्वीर में दिखे हैरान आदिवासी, इन्होंने पहले कभी नहीं देखा विमान

ब्राजीलिया। ब्राजील के उत्तर-पश्चिम में स्थित अमेजन के घने जंगल में आश्चर्यचकित आदिवासियों की अनोखी तस्वीरें सामने आई हैं। पिछले हफ्ते अमेजन नदी घाटी के ऊपर से गुजरते हुए एक विमान से यह तस्वीर खींची गई है, जिसमें अलग-थलग रहने वाली जनजाति के लोग दिखाई दिए हैं। 
 
ऐसा माना जा रहा है कि तस्वीर में कैद लोगों का बाहरी दुनिया से कोई संपर्क नहीं है। गौरतलब है कि पेरू के बॉर्डर से लगते आक्री राज्य में 200 से ज्यादा जनजातियां रहती हैं। स्थानीय सरकारी पॉलिसी के तहत इन जनजातियों के लोगों से संपर्क नहीं किया जाता, लेकिन सरकार इस क्षेत्र पर नजर रखती है, ताकि अवैध खनन माफिया और शिकारियों को रोका जो सके।    
 
तस्वीर में आदिवासियों के हाव-भाव देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि उन्होंने विमान को इससे पहले कभी नहीं देखा।
 प्लेन से खींची तस्वीर में दिखे हैरान आदिवासी, इन्होंने पहले कभी नहीं देखा विमान

प्लेन से खींची तस्वीर में दिखे हैरान आदिवासी, इन्होंने पहले कभी नहीं देखा विमान

प्लेन से खींची तस्वीर में दिखे हैरान आदिवासी, इन्होंने पहले कभी नहीं देखा विमान

sabhar :http://www.bhaskar.com/

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शनिवार, 29 मार्च 2014

मसाज के नाम पर परोसा जा रहा था सेक्स

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सेक्स रैकेट का खुलासा, छह लड़कियां गिरफ्तार

सेक्स रैकेट का खुलासा, छह लड़कियां गिरफ्तार

पुलिस ने मसाज पार्लर के नाम पर चल रहे एक सेक्स रैकेट का भंडाफोड कर मसाज पार्लर की मालकिन सहित छह लड़कियों को गिरफ्तार किया है।

गुड़गांव के पॉश एरिया कहे जाने वाले सेक्टर-31 के मार्केट से पुलिस ने देर रात इस सेक्स रैकेट का पर्दाफाश किया। बॉडी मसाज सेंटर के नाम पर चल रहे ये लड़कियां जिस्मफरोशी का कारोबार करती थी।

इस मामले में सेक्टर-40 थाना पुलिस ने छह लड़कियों को पकड़ा। जिन्हें शुक्रवार को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस के मुताबिक शहर में ऐसे बॉडी मसाज सेंटर पर सख्त निगरानी रखी जा रही है।


एलसीडी पर चल रही थी अश्लील फिल्म

एलसीडी पर चल रही थी अश्लील फिल्म


मसाज के नाम पर चल रहे इस काले धंधे का उजागर करने के लिए थाना प्रभारी इंस्पेक्टर जयप्रकाश सिंह ने सब-इंस्पेक्टर व हवलदार को ग्राहक बना कर भेजा।

रिसेप्शन पर बैठी लड़की ने दोनों से तीन हजार की रकम जमा कर दूसरे रूम में भेज दिया, जहां पर पांच युवती आपत्तिजनक हालत में बैठी मिली।

एलसीडी पर अश्लील फिल्म चल रही थी। ग्राहक बन गए पुलिस कर्मियों से युवतियों ने अश्लील हरकत शुरू की तो संकेत मिलते ही बाहर खड़ी महिला पुलिस कर्मी अंदर पहुंची और अश्लील हरकत करने वाली युवतियों को गिरफ्तार कर लिया।
दो से तीन हजार में होता था सौदा

दो से तीन हजार में होता था सौदा

मौके से पुलिस टीम ने अश्लील सीडी भी बरामद की। 22 से 26 साल की चार युवती काठमांडू नेपाल की मूल निवासी हैं।

वह इस समय दिल्ली के महिपालपुर में रह रही थी। एक युवती मूल रूप से शिमला व एक कोलकाता की रहने वाली है।

शिमला निवासी युवती पार्लर केयर टेकर थी, वह गुड़गांव के पटौदी रोड पर रह रही थी। पार्लर की दुकान द्वारका दिल्ली निवासी मंदीप ने किराए पर ली थी।

पुलिस उसकी भूमिका की जांच कर रही है। थाना प्रभारी ने कहा उसे भी गिरफ्तार किया जाएगा।

दिल्ली, नोएडा तथा फरीदाबाद तक फैला है नेटवर्क

दिल्ली, नोएडा तथा फरीदाबाद तक फैला है नेटवर्क

गिरफ्तार युवतियों ने कबूला कि उनके संपर्क दिल्ली व नोएडा तथा फरीदाबाद के भी कुछ कथित मसाज पार्लर से हैं, जहां वह कॉल आने पर जाती थी।

एक घंटे की कथित मसाज के वह तीन से चार हजार रुपए लेती थी। कई लोग तो उनसे सीधे संपर्क कर लेते थे

पुलिस आरोपियों के खुलासे के बाद पूरे नेटवर्क का खोजने में लगी है। पुलिस के अनुसार सभी लड़कियां पिछले तीन महीने से इस गोरखधंधे को अंजाम दे रही थी। sabhar :http://www.amarujala.com/



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विज्ञान की नजर में रुद्राक्ष की महिमा

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एक किंवदंती के अनुसार रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई है। शिव का यही प्रिय रुद्राक्ष अब वैज्ञानिकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र हो गया है और देश-विदेश में इस पर रूद्राक्ष पर शोध अनुसंधान जारी है।
रुद्राक्ष को नीला संगमरमर भी कहा जाता है। इसके वृक्ष भारत (पूर्वी हिमालय) के साथ-साथ नेपाल, इंडोनेशिया, जकार्ता एवं जावा में भी पाए जाते हैं। वनस्पतिशास्त्र में इसे इलियोकार्पस गेनिट्रस कहते हैं। गोल, खुरदुरा, कठोर एवं लंबे समय तक खराब न होने वाला रुद्राक्ष एक बीज है। बीज पर धारियां पाई जाती हैं जिन्हें मुख कहा जाता है। पांचमुखी रुद्राक्ष बहुतायात से मिलता है जबकि एक व चौदह मुखी रुद्राक्ष दुर्लभ हैं।
प्राचीन ग्रंथों में इसे चमत्कारिक तथा दिव्यशक्ति स्वरूप बताया गया है। मान्यताओं के अनुसार रुद्राक्ष धारण करने से दिल की बीमारी, रक्तचाप एवं घबराहट आदि से मुक्ति मिलती है। रुद्राक्ष के बताए चमत्कारिक गुण वास्तविक हैं या नहीं यह जानने हेतु देश-विदेश मेंकई शोध कार्य किए गए एवं कई गुणों की पुष्टि भी हुई।
सेंट्रल काउंसिल ऑफ आयुर्वेदिक रिसर्च नई दिल्ली में 1966 में आयुर्वेदिक औषधि में प्रकाशित किया गया जिसमें रुद्राक्ष थैरेपी की चर्चा की गई थी। अस्सी के दशक में बनारस के इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने डॉ. एस. राय के नेतृत्व में रुद्राक्ष पर अध्ययन कर इसके विद्युत चुंबकीय, अर्धचुंबकीय तथा औषधीय गुणों को सही पाया।
वैज्ञानिकों ने माना है कि इसकी औषधीय क्षमता विद्युत चुंबकीय प्रभाव से पैदा होती है। रुद्राक्ष के विद्युत चुंबकीय क्षेत्र एवं तेज गति की कंपन आवृत्ति स्पंदन से वैज्ञानिक भी आश्चर्य चकित हैं। इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी फ्लोरिडा के वैज्ञानिक डॉ. डेविड ली ने अनुसंधान कर बताया कि रुद्राक्ष विद्युत ऊर्जा के आवेश को संचित करता है जिससे इसमें चुंबकीय गुण विकसित होताहै। इसे डाय इलेक्ट्रिक प्रापर्टी कहा गया। इसकी प्रकृति इलेक्ट्रोमैग्नेटिक व पैरामैग्नेटिक है एवं इसकी डायनामिक पोलेरिटी विशेषता अद्भुत है।
भारतीय वैज्ञानिक डॉ. एस.के. भट्टाचार्य ने 1975 में रुद्राक्ष के फार्माकोलॉजिकल गुणों का अध्ययन कर बताया कि कीमोफार्माकोलॉजिकल विशेषताओं के कारण यह हृदयरोग, रक्तचाप एवं कोलेस्ट्रॉल स्तर नियंत्रण में प्रभावशाली है। स्नायुतंत्र (नर्वस सिस्टम) पर भी यह प्रभाव डालता है एवं संभवत: न्यूरोट्रांसमीटर्स के प्रवाह को संतुलित करता है।
वैज्ञानिकों द्वारा इसका जैव-रासायनिक (बायो कैमिकल) विश्लेषण कर इसमें कोबाल्ट, जस्ता, निकल, लोहा, मैग्नीज़, फास्फोरस, एल्युमिनियम, कैल्शियम, सोडियम, पोटैशियम, सिलिका एवं गंधक तत्वों की उपस्थिति देखी गई। इन तत्वों की उपस्थिति से घनत्व बढ़ जाता है एवं इसी के फलस्वरूप पानीमें रखने पर यह डूब जाता है।
पानी में डूबने वाले रुद्राक्ष को असली माना जाता है, कुछ लोग यह भी मानते हैं कि दो तांबों के सिक्कों के मध्यरखने पर यदि इसमें कंपन होता है, तो यह असली है। असल में इस कंपन का कारण विद्युत चुंबकीय गुण तथा डायनामिक पोलेरिटी हो सकता है। जैव वैज्ञानिकों ने रुद्राक्ष में जीवाणु (बैक्टीरिया), विषाणु (वायरस), फफूंद(फंगाई) प्रतिरोधी गुणों को पाया है। कुछ कैंसर प्रतिरोधी क्षमता का आकलन भी किया गया है।
चीन में हुए खोज कार्य दर्शाते हैं कि रुद्राक्ष यिन-यांग एनर्जी का संतुलन बनाए रखने में कारगर है। दुनियाभर के वैज्ञानिक रुद्राक्ष के इतने सारे गुणों को एक साथ देखकर आश्चर्यचकित हैं।
sabhar :http://naidunia.jagran.com/

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शुक्रवार, 28 मार्च 2014

जो जितना लम्बा उतना ही बुद्धिमान

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यूं तो आपकी बौद्धिक क्षमता कुछ तो आनुवांशिक और माता पिता द्वारा सहचर्य के दौरान की गई भावना से संबंधित होती है. लेकिन शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि लंबे लोगों के डीएनए और बुद्धिमत्ता का आपस में गहरा संबंध है.
मुख्य अध्ययनकर्ता रिकाडरे मारिओनी ने कहा कि हमने डीएनए आधारित आनुवांशिक समानताओं के माध्यम से लंबे लोगों की बुद्धिमता और ऊंचाई से जुड़े तथ्यों का अध्ययन किया. हमने पाया कि लोगों की शारीरिक लंबाई और बुद्धिमत्ता का आपस में संबंध है. जो लोग शारीरिक रूप से अधिक लंबे होते हैं, वे बुद्धिमान भी होते हैं.
इसका मतलब यह नहीं कि जिनकी लम्बाई कं होती है वह् बुद्धू होते हैं, लेकिन हां दोनों की तुलना की जाए तो, लंबे व्यक्ति का आईक्यू ठींगने व्यक्ति से अधिक पाया गया है.
शोधकर्ताओं ने बताया कि लंबाई और बुद्धिमता का संबंध मानव के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ भी है. वैसे आपकी लंबाई अगर औसत है, तो निराश न हों, क्योंकि शोधकर्ताओं के मुताबिक 70 प्रतिशत कम लंबाई वाले लोगों की बुद्धिमत्ता का स्तर आनुवांशिक कारणों से निर्धारित होता है.sabhar :http://www.palpalindia.com/

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