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गुरुवार, 20 फ़रवरी 2014

एक निर्देशक को एक ‌अभिनेत्री ने मारा थप्पड़

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 geetika tyagi slaps Subhash Kapoor for molesting her

जॉली एलएलबी फेम निर्देशक सुभाष कपूर को एक नवोदित अभिनेत्री ने थप्पड़ मारा है। इसका वीडियो खुद उस अभिनेत्री ने जारी किया। 

जॉली एलएलबी जैसे बड़ी फिल्‍म बनाने वाले फिल्म निर्देशक सुभाष कपूर इस बार गलत वजहों से चर्चाओं में हैं। उन पर एक नवोदित अभिनेत्री गीतिक त्यागी ने आरोप लगाया कि उन्होंने उनके साथ अश्‍लील हरकत की है। 

गीतिका ने इस हरकरत से खफा होकर सुभाष कपूर को थप्पड़ भी मारा है। इस पूरे घटनाक्रम का गीतिका ने वीडियो भी बनाया है। वीडियो बनाने के बाद गीतिका ने इसे यूट्यूब पर अपोलड भी कर दिया है। 

इस वीडियो में दिखाया गया है कि गीतिका सुभाष पर कई तरह के आरोप लगा रही हैं। सुभाष अपनी पत्नी के साथ चुपचाप खड़े हैं। सुभाष यह भी कह रहे हैं कि यदि उस लड़की को लगता है कि मैने उसके साथ बुरी हरकत की है। तो वह लड़की उन्हें थप्पड़ मार सकती है। 

सुभाष यह बात कई बार दोहराते हैं। आखिरकार वह लड़की रोती हुई सुभाष को थप्पड़ मार देती है। हालां‌कि इस बात की कोई एफआईआर नहीं दर्ज कराया गया है। और न ही इस मसले पर सुभाष की तरफ से कोई प्रतिक्रिया आई है।  sabhar :http://www.amarujala.com/

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बुधवार, 19 फ़रवरी 2014

इस मराठी मॉडल ने न्यूड होकर मचाया तहलका

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मुंबई। पूनम पांडे, शर्लिन चोपड़ा और वीना मलिक जैसी मॉडल्स के बाद अब मराठी मॉडल निकिता गोखले 'प्लेबॉय' मैगजीन के लिए न्यूड हो गईं हैं।एक मराठी वेबसाइट से मिली जानकारी के मुताबिक निकिता ने हाल ही में हॉलीवुड मैगजीन प्लेब्वॉय के लिए अपने कपड़े उतार दिए हैं। खबरों के मुताबिक निकिता ने हाल ही में मैगजीन के लिए न्यूड होकर फोटो शूट कराया है। निकिता की फोटो मैगजीन के मालिक हग हेफनर को भेजी गई है, अगर वे निकिता की फोटो का चयन कर लेते हैं तो निकिता शर्लिन के बाद इस मैगजीन के साथ न्यूड फोटो शूट कराने वाली दूसरी भारतीय मॉडल बन जाएंगी।निकिता नागपुर की रहने वाली हैं और इन्होंने इससे पहले कई मॉडलिंग असाइनमेंट्स किए हैं। इससे पहले शर्लिन ने इस मैगजीन के कवर पेज के लिए फोटो शूट कराया था। sabhar : jagaran.com

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गंगनचुंबी इमारतें बनाएंगे रोबोट

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वाशिंगटन। हारवर्ड में भारतीय मूल के वैज्ञानिक ने स्वेच्छा से काम करने वाले रोबोट की एक पूरी सेना तैयार कर ली है। ये रोबोट आपसी समायोजन से बिना किसी मानवीय निगरानी के गगनचुंबी इमारतों से लेकर पिरामिड तक बना सकते हैं।
अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि इन्हें ठोस ढांचों को खड़ा करने में सक्षम ये रोबोट सामूहिक बुद्धिमत्ता और समायोजन से कार्य करते हैं। इन्हें किसी निगरानी और दिशा-निर्देश देने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। इस प्रणाली को किसी निगरानी और कैमरे से निगरानी की जरूरत नहीं पड़ती है। उनकी सहूलियत के लिए किसी खास किस्म के वातावरण बनाने की भी आवश्यकता नहीं पड़ती है। हारवर्ड यूनिवर्सिर्टी के वैानिकों ने ये टर्म्स प्रणाली बनाई है। इसके जरिए रोबोट जटिल और तीन आयामों वाले ढांचों को बिना किसी केंद्रीय कमान या निर्देशित नियमों के बाखूबी बना सकते हैं। टर्म्स प्रणाली की मदद से ऊंची इमारतें, महल, पिरामिड फोम ब्रिक से बनाए जा सकते हैं। इस प्रणाली के जरिए इमारत की सामग्री के जरिए खुद ब खुद ऐसी सीढि़यां बनाई जाती हैं। जिससे गुजरकर ये रोबोट ऊंचे स्थानों तक पहुंचते हैं और उस पर जरूरत के हिसाब से ईंटें जमाते जाते हैं। अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि भविष्य में ऐसे रोबोट बाढ़ आने पर पानी रोकने के लिए बालू की बोरियां लगाने से लेकर मंगल ग्रह पर निर्माण कार्य में भी बखूबी भाग ले सकते हैं।
इस प्रणाली की सबसे अच्छी बात ये है कि जटिल से जटिल कार्य को सामूहिक रूप से ये रोबोट बिना किसी देखरेख के अंजाम दे सकते हैं। ऐसे में जहां इंसान की हदें खत्म होती हैं वहां भी इन रोबोट से बेहतरीन काम लिया जा सकता है। इन रोबोट को काम कराने के लिए माहौल या वातावरण को बदलने की भी जरूरत नहीं है। जैसे बाढ़ में बचाने वालों के भी जीवन का ख्याल रखना होता है। मंगल ग्रह पर इंसान को भेजने के लिए वहां के वातावरण के अनुकूल ही माहौल बनाना होगा। पर इन रोबोट के लिए ये सीमाएं नहीं हैं। इस प्रोजेक्ट की मुख्य जांचकर्ता हारवर्ड में इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस की प्रोफेसर राधिका नागपाल और फ्रेड कावली हैं। प्रत्येक रोबोट बिल्डिंग बनाने की इस प्रक्त्रिया में दूसरे रोबोट के समानान्तर काम करता है। लेकिन उसे ये नहीं पता होता कि उसी वक्त यही काम और कौन कर रहा है। ऐसे में अगर कोई एक रोबोट टूट गया या काम से हट गया तो इससे दूसरे रोबोट पर असर नहीं पड़ता और वह अपना काम करता रहता है। यानी इस प्रणाली के जरिए एक निर्देश पांच रोबोट या पांच हजार रोबोट को एक साथ दिया जा सकता है। टर्म्स प्रणाली मापने, वितरण प्रणाली और आर्टीफियल इंटेलिजेंस का बेजोड़ नमूना है। नागपाल के इस स्वनियंत्रित प्रणाली अनुसंधान को एलगारिथम के हिसाब से तैयार किया गया है। जिसमें रोबोट का एक समूह एक कालोनी की तरह काम करता है। सभी रोबोट एक समूह में एक इकाई की तरह उच्च स्तरीय काम करते हैं। sabhar :http://www.jagran.com/

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वैज्ञानिकों ने बनाया 'न सड़ने वाला आलू'

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लाल आलू

ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने ऐसा जेनेटिकली मॉडिफाइड (जीएम) आलू विकसित किया है जिसमें लेट ब्लाइट (फफूंद के कारण होने वाली सड़न) नहीं होगी.
तीन साल तक किए गए परीक्षण में यह जीएम आलू इस बीमारी के प्रभाव में आने के बावजूद विकसित होने में सफल रहा.

यह शोध फिलोसॉफिकल ट्रांजेक्शन ऑफ दि रॉयल सोसाइटी ब्रिटेन जर्नल में प्रकाशित हुआ है.फफूंद के कारण होने वाली सड़न से किसान कई पीढ़ियों से परेशान रहे हैं. आलू में फफूंद से होने वाली सड़न के कारण ही आयरलैंड में साल 1840 के दशक में आलू की खेती का सूखा पड़ा था.

यूरोप में प्रभाव

फफूंद के कारण सड़न का सबसे आसान शिकार आलू ही होता है. आलू जैसी सब्ज़ियों को सड़ाने वाली यह फंफूद नमी और उमस वाले मौसम में विशेष रूप से पनपती है. यूरोप में आलू के उत्पादन के मौसम में आमतौर पर नमी और उमस पाई जाती है.
यह संक्रमण बहुत तेज़ी से फैलता है और इसका असर इतना व्यापक होता है कि ब्रिटेन में पैदा होने वाले कुल आलू में से 60 लाख टन आलू इसकी वजह से सड़ जाता है.
इससे बचने के लिए किसानों को लगातार सावधान रहना पड़ता है. इससे बचाव के लिए उन्हें साल में 15 बार तक कीटनाशकों का छिड़काव करना पड़ता है.
बॉयो-टेक्नॉलॉजी के प्रयोग से फसलों को बचाने की संभावना की जांच के लिए यूरोप-स्तर पर शोध कर रहे जॉन इन्ज़ सेंटर और सेंसबरी प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों ने साल 2010 से ही जेनेटिक मॉडिफिकेशन की सहायता से ऐसी सड़न रोकने के लिए परीक्षण शुरू कर दिए थे.
आलू की सड़न
शोधकर्ताओं ने लाल आलू की एक प्रजाति में दक्षिणी अमरीका के एक जंगली आलू का एक ऐसा जीन डाला जिसकी वजह से इस आलू में फफूंद से होने वाली सड़न के ख़िलाफ़ प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने में मदद मिली.
शोध से जुड़े हुए वैज्ञानिकों ने बताया कि इस आलू में अतिरिक्त जीन डालना आलू के पौधे की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए ज़रूरी है.
इस शोधपत्र के प्रमुख लेखक और सेंसबरी प्रयोगशाला के प्रोफ़ेसर जोनाथन जोंस कहते हैं, "मुझे लगता है कि इस बीमारी पर रासायनिक रूप से नियंत्रण करना बेहतर विकल्प है."
साल 2012 में परीक्षण के तीसरे साल ग़ैर-जीएम आलुओं में अगस्त तक सड़न होने लगी थी जबकि जीएम आलुओं में सड़न नहीं हुई.
दूसरी सबसे ख़ास बात है कि इन जीएम आलुओं की पैदावार की दर भी सामान्य आलुओं से लगभग दोगुनी रही.

स्वाद का सवाल

हालांकि वैज्ञानिकों ने इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं की है कि इस जीएम आलू का स्वाद कैसा है क्योंकि उन्हें जीएम आलू को खाने की मनाही थी. लेकिन वैज्ञानिकों ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ऐसी कोई वजह है जिससे नए जीन से आलू का स्वाद बदल जाए.
"इससे किसानों को फायदा ही होगा. उन्हें बीज पर ज़्यादा खर्च करना होगा लेकिन सड़न से बचाव पर होने उनके खर्च में काफ़ी कमी आएगी. "
जोनाथन जोंस, शोधपत्र के प्रमुख लेखक और सैंसबरी प्रयोगशाला के प्रोफ़ेसर
फफूंद के कारण होने वाली सड़न बार-बार सिर उठा लेने वाली बीमारी है इसलिए सेंसबरी प्रयोगशाला के वैज्ञानिक ऐसे जीन की तलाश में हैं जो आलू की प्रतिरोधक क्षमता को और ज़्यादा बढ़ा सके.
इस तकनीक से आलुओं में फफूंद के कारण सड़न की मात्रा में काफ़ी कमी आ सकेगी. हालांकि इससे यह जीएम आलू थोड़ा महंगा हो जाएगा.
प्रोफ़ेसर जोंस कहते हैं, "फिर भी इससे किसानों को फायदा ही होगा. उन्हें बीज पर ज़्यादा खर्च करना होगा लेकिन सड़न से बचाव पर होने उनके खर्च में काफ़ी कमी आएगी."
वैज्ञानिकों का मानना है कि असल चुनौती इस जीएम आलू के उत्पादन की अनुमति प्राप्त करना है.
वैज्ञानिकों ने इस जीएम आलू के उत्पादन का लाइसेंस एक अमरीकी कंपनी सिम्पलोट को दिया है.
यह कंपनी इस आलू को अमरीका में पैदा करना चाहती है.
प्रोफ़ेसर जोंस कहते हैं, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि यूरोप के करदाताओं के पैसे का लाभ यूरोप के लोगों से पहले अमरीकी किसानों को मिलेगा."
वे कहते हैं, "इस तरह के उत्पाद अमरीकी बाज़ार में अगले कुछ सालों में और यूरोप में अगले आठ से 10 सालों में आएँगे."

कौन पैदा करेगा, खाएगा और बेचेगा ?

आलू की सड़न
जीएम खाद्य पदार्थों के आलोचकों का कहना है कि चाहे जितना भी बड़ा पर्यावरणीय लाभ हो उन्हें विश्वास है कि ग्राहक इसमें रुचि नहीं दिखाएंगे.
इस तरह के खाद्य पदार्थों का विरोध करने वाली संस्था जीएम फ्रीज़ के निदेशक लिज़ ओ-नील कहते हैं, "क्या सचमुच कोई जीएम आलू पैदा करने, बेचने या ख़रीदने जा रहा है? क़ानून कहता है कि ऐसे पदार्थों पर जीएम लिखना अनिवार्य है. हमारे अनुभव बताते हैं कि ब्रितानी लोग ऐसी चीज़ें नहीं खरीदना चाहते और ब्रितानी ऐसी चीज़ें नहीं पैदा करेंगे जिसे वह बेच नहीं सके."
दूसरे कई शोधकर्ताओं ने इस नए शोध का स्वागत करने के बावजूद इस नए जीएम आलू के ब्रिटेन में उत्पादन को लेकर नकारात्मक प्रतिक्रिया दी है.
एबेरीस्टविथ विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर क्रिस पोलाक कहते हैं, "आलू में होने वाली सड़न एक मुश्किल बीमारी है. दुर्भाग्यवश यूरोप का मौजूदा क़ानून काफ़ी महंगा और धीमा है. इसका मतलब यह है कि ब्रितानी वैज्ञानिकों की उपलब्धि का लाभ पहले दूसरे देशों को मिलेगा."

इस परीक्षण के लिए वैज्ञानिकों ने आलू के केवल 600 पौधे उगाए थे. हालांकि तीन साल तक चले परीक्षण में आलुओं को बचाए रखने में 40,000 पाउंड (तक़रीबन साढ़े 41 लाख रुपये) खर्च हुए. sabhar :http://www.bbc.co.uk/

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मंगलवार, 18 फ़रवरी 2014

दाढ़ी-मूंछों में खुद को Sexy समझती है ये लड़की

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जी हां आपने बिल्कुल ठीक सुना ये लड़का नहीं बल्कि दाढ़ी मूंछों वाली लड़की है. जिसका नाम हरनाम कौर है जिसके मर्दों की तरह दाढी-मूंछों के साथ-साथ छाती में भी बाल है. हरमान इन बालों में ही खुद को सेक्सी समझती है हरनाम ने खुद से वादा किया है कि वो कभी बाल नहीं कटवाएगी. हरनाम जहां भी जाती है अपनी दाढ़ी-मूंछो के साथ ही जाती है और साथ में सिर पर पगड़ी भी बांधती है जिसें देखने वाले एकबार तो सरदार जी समझ बैठते हैं, लेकिन हकीकत कुछ ही लोग जानते हैं. दरअसल बात यह है.हरनाम कौर को पॉलीसाइटिक ओवरी सिंड्रोम नाम की बीमारी है. जब वो केवल 11 साल की थीं तभी उनकी दाढ़ी आना शुरू हो गई थी कहती हैं कि उन्होंने फैसला किया है कि वो कभी भी अपने चेहरे के बाल नहीं काटेंगी. उन्हें लगता है कि इस दाढ़ी के साथ वो ज्यादा सेक्सी और सुंदर लगती हैं..वो कहती हैं कि उनके इस फैसले से उनके मां-बाप संतुष्ट नहीं थे. लेकिन उनके भाई ने उनके इस फैसले में उनका पूरा सहयोग किया.एक ओर जहां लड़की के लिए दुख का कारण हो सकता है वहीं हरनाम ने एक बहुत ही बहादुरी वाला फैसला लिया है इतना ही नहीं बल्कि कई अनजान लोगों से उन्हें मारने तक की धमकियां मिली.हरनाम का कहना है कि अपने बालों की वजह से उन्हें स्कूल में ताने तक सुनने पड़े ये बाल न केवल उनके चेहरे पर हैं बल्कि उनके हाथ और छाती पर भी पर्याप्त बाल हैं.
















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अगर आप कामेच्छा बढ़ाने वाली दवा लेते हैं तो सावधान हो जाएं

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वायग्रा लेना हो सकता है खतरनाक

वायग्रा लेना हो सकता है खतरनाक


अगर आप कामेच्छा बढ़ाने वाली दवा लेते हैं तो सावधान हो जाएं। जी हां, एक रिसर्च में पाया गया है कि कामेच्छा बढ़ाने वाली पिल वायग्रा को सही अंदाज में ना लिया जाए तो उससे कई समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।

रिसर्च के मुताबिक, यदि वायग्रा के साथ किसी और ड्रग को लिया जाए तो उससे व्य‌क्ति का शरीर सुन्न हो सकता है। दरअसल, वायग्रा के साथ दूसरा ड्रग लेने से सेरोटोनिन सिंड्रोम नाम बीमारी हो जाती है।
क्या होगा नुकसान

क्या होगा नुकसान

डेली मेल पर प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टर्स इस बात की चेतावनी दे रहे हैं कि 'सेक्सटेसी' ट्रेंड के चलते लोग एक साथ दो-दो ड्रग ले रहे हैं। जबकि ये लाइफ के लिए खतरनाक हो सकता है।

दो ड्रग साथ में लेने से शरीर में काफी मात्रा में सेरोटोनिन नाम पदार्थ काफी हो जाता है जो कि कोमा का कारण बन सकता हैं। 30 की उम्र के बाद वायग्रा लेने वालों को ये खतरा ज्यादा है। sabhar :http://www.amarujala.com/

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बड़े-बड़े बॉडीबिल्डर्स को भी देते हैं मात 70 साल के सैम सोनी ब्रयांट

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70 साल के सैम सोनी ब्रयांट, बड़े-बड़े बॉडीबिल्डर्स को भी देते हैं मात

अमेरिका के जॉर्जिया प्रांत के सैम सोनी ब्रयांट 70 वर्ष की उम्र में भी नौजवानों को मात देने की हैसियत रखते हैं। पेशे से बॉडीबिल्डर सैम की फिट बॉडी युवाओं को भी शर्मिंदा कर दे। खासकर तब जब ये पता चले कि उनकी उम्र 70 साल है और उम्र के इस पड़ाव में भी वो हर दिन शारीरिक रूप से मजबूत होते जा रहे हैं। 
 
सैम ने बताया कि जब लोग उनसे उनके रिटायरमेंट के बारे में पूछते हैं, तो उनका जवाब होता है कभी नहीं। सैम ने 44 साल की उम्र में तब वर्जिश करना शुरू किया, जब उनकी वैवाहिक जिंदगी ठीक नहीं चल रही थी। शुरुआती दौर में वो जिम में अपना तनाव दूर करने जाते थे। उन्हें वर्जिश और वेट लिफ्टिंग के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।  
 
सैम ने कभी हार मानना नहीं सीखा था। शायद इसीलिए सिर्फ 11 महीनों में उन्होंने ऐसा शरीर बना लिया, कि उनके इंस्ट्रक्टर उन्हें बॉडीबिल्डिंग कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेने के लिए कहने पर मजबूर हो गए। कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेने की बात पर सैम भी हैरान थे। उन्होंने अपने इंस्ट्रक्टर से कहा कि क्या आपको ऐसा लगता है, तो इंस्ट्रक्टर ने जवाब हां में दिया। 
 
इसके बाद सैम कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेने जॉर्जिया गए। सैम ने इससे पहले कभी भी किसी भी तरह के कॉन्टेस्ट में हिस्सा नहीं लिया था। सैम को कॉन्टेस्ट में जीत हासिल हुई। यहीं से सैम को बॉडीबिल्डिंग का क्षेत्र पसंद आने लगा। 
70 साल के सैम सोनी ब्रयांट, बड़े-बड़े बॉडीबिल्डर्स को भी देते हैं मात

सैम देखते ही देखते जिम जाने के आदी हो गए। उन्हें वर्जिश करना अच्छा लगने लगा। उम्र भी इसमें बाधा नहीं बन सकी। वहीं, सैम उम्र को लेकर कहते हैं कि ये सब अपनी धारणा पर निर्भर करता है। लोग इस गलतफहमी का शिकार हो जाते हैं कि उम्र उन्हें बूढ़ा कर रही है, इसलिए उन्हें खुद भी बुढ़ापा महसूस होने लगता है। सैम ने कहा कि उन्हें लगता है कि ये एक मानसिक स्थिति है।


70 साल के सैम सोनी ब्रयांट, बड़े-बड़े बॉडीबिल्डर्स को भी देते हैं मात

सैम को बहुत से लोगों ने चुनौती दी, कि जब वो उनकी उम्र में पहुंचेंगे, तब उन्हें उम्र का एहसास होगा। इस पर सैम ने उन लोगों को जब अपनी असल उम्र बताई, तो वो शर्मिंदा हो गए। सैम कहते हैं कि ये सब इनसान के अवचेतन मन में होता है। इनसान जब ये सोचने लगता है कि वो बूढ़ा हो गया, तो उसका शरीर भी बुजुर्ग की तरह काम करने लगता है। इस तरह इनसान हर दिन बूढ़ा होता चला जाता है। सैम ने कहा वो इन बातों में विश्वास नहीं करते। 

70 साल के सैम सोनी ब्रयांट, बड़े-बड़े बॉडीबिल्डर्स को भी देते हैं मात

सैम चाहते हैं कि लोग उन्हें उनके काम की वजह से याद करें। सैम लोगों के लिए रोल मॉडल बनना चाहते हैं। सैम ने बताया कि उन्होंने बहुत से युवाओं और उनके जिंदगी जीने के तरीके को देखा है। ज्यादातर युवा छुट्टियों में घर जाते हैं और दिनभर घर में बैठकर टीवी देखते हैं। इसके सिवा कुछ नहीं करते। सैम कहते हैं कि वो ऐसा नहीं कर सकते। वो घर में इतने लंबे वक्त तक नहीं रह सकते। वो हमेशा व्यस्त रहना चाहते हैं

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सोमवार, 17 फ़रवरी 2014

बॉलीवुड काट रहा था सनी से कन्नी, सलमान ने कर दी मदद

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बॉलीवुड काट रहा था सनी से कन्नी, सलमान ने कर दी मदद

मुंबई. पोर्न स्टार वाली इमेज के कारण सनी लियोनी अभी तक अछूत की तरह ट्रीट की जाती थीं। न किसी बड़े फिल्म स्टार की पार्टी में उन्हें आमंत्रित किया जाता था, न किसी बड़े फिल्मी समारोह का बुलावा आता था।
 
पिछले साल एक स्टार डांडिया नाइट से उन्हें बैरंग वापस लौटना पड़ा था तो कपिल शर्मा ने अपने शो ‘कॉमेडी नाइट विद कपिल’ में फिल्म ‘जैकपॉट’ के प्रमोशन के लिए उन्हें होस्ट करने से मना कर दिया था। पर सलमान ख़ान ने उनकी इमेज पर झाड़ू-पोंछा लगा दिया है। जब से सलमान के कहने पर उन्हें ‘सेलिब्रिटी क्रिकेट लीग’ में फिल्म बिरादरी के बीच बुलाया गया है, लोगों ने छुआछूत का बर्ताव बदल दिया है।
 
सूत्रों के अनुसार, सनी से कन्नी काटने वाले कपिल ने उनकी आने वाली फिल्म ‘रागिनी एमएमएस-2’ के लिए खुद अपने शो में आमंत्रित किया है।  वैसे सनी महेश भट्ट कैंप और एकता कपूर कैंप के भी बाहर के कई प्रॉड्यूसर-डायरेक्टर और स्टार्स से काफी फ्रेंडली हो गई हैं। डिनो मोरिया, रणदीप हुड्डा, सोनू सूद जैसे कई एक्टर्स तो उनकी बोल्डनेस, सेल्फ कॉन्फिडेंस व ईमानदारी की तारीफ करते हुए उनके साथ काम करने की बेताबी भी जता चुके हैं।
 
वैसे पिछले दिनों दुबई में हुए एक CCL मैच में सलमान और कपिल के साथ नजर आने के अलावा सनी को जनवरी 2014 में हुए प्रोड्यूसर्स गिल्ड अवॉर्ड्स में भी बुलाया गया था। इस अवॉर्ड के होस्ट सलमान खान ही थे और उन्होंने स्टेज पर सनी को बुलाकर उन्हें साड़ी बांधना भी सिखाया था
बॉलीवुड काट रहा था सनी से कन्नी, सलमान ने कर दी मदद

बॉलीवुड काट रहा था सनी से कन्नी, सलमान ने कर दी मदद


बॉलीवुड काट रहा था सनी से कन्नी, सलमान ने कर दी मदद


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हवा से ऑक्सीजन स्टोर कर हाइड्रोजन से चलेगी ये बाइक

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हाइड्रोजन से चलेगी ये बाइक, हवा से ऑक्सीजन स्टोर कर लेती है इसकी बैटरी

ग्रेटर नोएडाऑटो एक्सपो में एक से बढ़कर एक कारें और बाइक्स लॉन्च हुईं। कुछ बाइक्स और स्कूटर ऐसे रहे जो लोगों की नजरों में समा गए। हम ऐसे ही कुछ बाइक्स और स्कूटर्स को पेश कर रहे हैं, जिन्हें आप भी देखना पसंद करेंगे।
वैसे तो ऑटो एक्सपो 2014 में हर कार, बाइक और कॉन्सैप्ट्स देखने लायक थे। लेकिन ऑटो एक्सपो में कुछ ऐसे टू-व्हीलर्स पेश किए गए, जिनके इर्द-गिर्द दर्शकों की भारी भीड़ जमा रही। इन्हें हर कोई अपने कैमरे में कैद करना चाहता था। हो भी क्यों न देखने में ये बाइक्स और स्कूटर्स हैं भी जोरदार। 
HERO CONCEPT:आईऑन
हीरो ने ऑटो एक्सपो 2014 में हाइड्रोजन फ्यूल सेल व्हीकल का कॉन्सेप्ट पेश किया। इसमें एडवांस्ड ली-एयर बैटरीज लगी हुई हैं, जो हवा से ऑक्सीजन स्टोर करती हैं। ब्रेकिंग और एक्सिलेशन के लिए सुपर-कैपिसिटर्स इसके फीचर्स में शामिल हैं।

हाइड्रोजन से चलेगी ये बाइक, हवा से ऑक्सीजन स्टोर कर लेती है इसकी बैटरी


पियाजियो एप्रिला शिवर 750
पियाजियो बिग बाइक पोर्टफोलियो को बढ़ाने की तैयारी में है। कंपनी ने ऑटो एक्सपो में एप्रिला शिवर 750 पेश की। यह बाइक 95 पीएस का मैग्जिमम पावर और 81 एनएम का पीक टर्क देती है। इंजन तीन राइडिंग मोड- स्पोर्ट, टूरिंग और रेन में आता है। सिक्स गियर बॉक्स के साथ आने वाली इस बाइक की कीमत 8-10 लाख रुपये हो सकती है। यह स्मार्ट लुकिंग बाइक 17 इंच एल्युमिनियम बाइक व्हील्स पर फर्राटा भरेगी
हाइड्रोजन से चलेगी ये बाइक, हवा से ऑक्सीजन स्टोर कर लेती है इसकी बैटरी
डीएसके ह्योसंग अकीला 250
ऑटो एक्सपो में डीएसके ह्योसंग ने अकीला 250 क्रूजर बाइक पेश की। यह 250 सीसी, ऑयल कूल्ड, वी-ट्विन, 8-वाल्व इंजन के साथ उतारी जाएगी। इंजन 9,500 आरपीएम पर 26.5 पीएस की पावर और 7,000 आरपीएम पर 21 एनएम का टॉर्क देगा। इस कोरियाई बाइक की कीमत 2.69 लाख रुपये होगी। यह बाइक महंगी है, लेकिन अपने देश में बिकने वाली वी-ट्विन क्रूजर में सबसे सस्ती। sabhar : bhaskar.com




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मुगल गार्डन जनता के लिए खुल गया

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16 फरवरी से मुगल गार्डन जनता के लिए खुल गया है, उससे पहले ही हमारे प्रेस फोटोग्राफर बंधुओं ने मुगल गार्डन के सारे खूबसूरत नजारों को कैमरे में कैद कर लिया...suchitra singh

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रविवार, 16 फ़रवरी 2014

चीन के डॉक्‍टरों ने एक टीनएजर लड़की की ब्रेस्‍ट पर नया चेहरा उगा दिया

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विज्ञान का चमत्‍कार, ब्रेस्‍ट पर उगाया चेहरा!


इसे विज्ञान का चमत्‍कार ही कहेंगे कि चीन के डॉक्‍टरों ने एक टीनएजर लड़की की ब्रेस्‍ट पर नया चेहरा उगा दिया। कुछ समय पहले तक शरीर के किसी अंग के कटने या खराब होने के बाद उसे फिर ठीक करना लगभग असंभव था। लेकिन अब डॉक्‍टर शरीर के किसी भी अंग को दोबारा बनाने में सक्षम हैं।
दरअसल, डॉक्‍टरों ने एक टीनएजर लड़की की ब्रेस्‍ट पर चेहरा उगाकर उसे नया जीवन दिया है। 17 साल की जु जियानमेई जब 5 साल की थीं तो उनका चेहरा आग में बुरी तरह झुलस गया था और अब पिछले सप्ताह उनकी सर्जरी की गई है। ऑपरेशन के बाद होश आने पर अपनी ठुड्डी, पलकें और कान देखकर वह खुशी से फूले नहीं समाई। लेकिन जू ने कहा कि सबसे अच्‍छी बात यह है कि 12 सालों में वह पहली बार अब ठीक से मुस्‍कुरा पाएंगी।
डॉक्टर्स ने जु की टांगों के ब्लड वेसल को उसकी छाती पर प्लांट कर नया चेहरा बनाया। डाक्टरों ने जु की टांगों से ब्लड वेसल निकाले और वॉटर बैलून से इन्हें एक्सपेंड किया गया, ताकि झुलसी हुई त्वचा के अनुसार स्किन तैयार की जा सके। डॉक्टरों को ब्लड वेसल से चेहरा तैयार करने में लगभग एक साल का समय लग गया। डॉक्‍टर जियांग जेझांग के कहे अनुसार, 'अब जु खुद अपने नए चेहरे को बेहतर तरीके से अभिव्‍यक्‍त कर पाएगी। भाव बदलने पर उसके चेहरे पर लालिमा भी छाएगी, लेकिन इसमें अभी थोड़ा समय लगेगा।'
चीनी डॉक्‍टरों की टीम का कहना है कि उन्‍होंने हाल के महीनों में ऐसे कई ऑपरेशन किए हैं। यह वही डॉक्‍टरों की टीम है, जिन्‍होंने सड़क दुर्घटना में घायल एक व्यक्ति के माथे पर नाक उगाई थी।

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