Sakshatkar.com : Sakshatkartv.com

.

Item Post Navigation Display

Home Recent Posts Display

Related Posts Display

सोमवार, 10 फ़रवरी 2014

एक गोभी के एक पौधे में एक साथ 12 फूल निकल आए

0

कुदरत का करिश्‍मा : गोभी के एक पौधे में उगे 12 फूल

महराजगंज (उप्र) : इसे कुदरत का करिश्मा कहें या रासायनिक खादों का बुरा प्रभाव कि एक गोभी के एक पौधे में एक साथ 12 फूल निकल आए, जिसे देखकर लोग चकित हैं। 

क्षेत्र के बावन बुजुर्ग बल्ला स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय के शिक्षक आरके विश्वकर्मा ने अपने घर के पास क्यारी में फूलगोभी की नर्सरी लगाई थी, जिसमें यह अनोखा फूल खिला देख स्कूल के छात्र व अध्यापक चकित रह गए। एक ही तने में एक साथ 12 फूल खिलने की खबर जैसे ही फैली, देखने वालों का तांता लग गया। चर्चा रही कि गोभी के एक पौधे में 12 फूल आना कुदरत का करिश्मा है। (एजेंसी) sabhar :http://zeenews.india.com/

Read more

मुक्ति और ईश्वर की भक्ति

0


why you forget me god?


मुक्ति पाने के लिए खुद को अज्ञानी और बुद्घिहीन क्यों कहते हैं भक्त


ऋषि-मुनियों, संत-महात्माओं तथा भक्तों ने भगवान से अपने अवगुणों को अनदेखा कर शरण में लेने की प्रार्थना की है। संत कवि सूरदास प्रभु मेरे अवगुण चित न धरोपंक्तियों में विनयशीलता का परिचय देते हुए शरणागत करने की प्रार्थना करते हैं, तो तुलसीदास प्रभु राम से पूछते हैं, काहे को हरि मोहि बिसारो।

संत पुरंदरदास खुद को दुर्गुणों का दास बताते हुए ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर कहते हैं- कूट-कूटकर मुझमें भरे हुए हैं दुर्गुण, नहीं किया पर तुमने मेरा छिद्रान्वेषण।गुरु नानकदेव जी मात्र भगवान श्रीराम को विपत्ति का साथी बताते हुए कहते हैं- संग सखा सभि तज गए, कोई न निबाहियो साथ, कहु नानक इह विपत्ति में, टेक एक रघुनाथ।
रवींद्रनाथ ठाकुर गीतांजलि में प्रार्थना करते हैं, भगवान अपनी चरण-धूलि के तल में मेरे शरीर को नत कर दो। मेरे समस्त अहंकार को अपने दिव्य नैनों के जल में डुबो दो। मैं चाहता हूं चरम शांति, अपने प्राणों में तुम्हारी परम कांति। तुम मेरे हृदय कमल दल में वास कर जाओ।

महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला निखिल वाणी में प्रभु से याचना करते हैं, दुरित दूर करो नाथ, अशरण हूं गहो हाथ। अर्चना में वह कहते हैं, जब तक शत मोहजाल, घेर रहे हैं कराल, जीवन के विपुल व्याल, मुक्त करो विश्वनाथ।
सभी शास्त्रों में विनयशीलता और अहंकारशून्यता को ईश्वर की भक्ति प्राप्त करने का साधन बताया गया है।

मुक्ति पाना चाहते हैं, रामकृष्ण परमंस की यह बात गांठ बांध लें।


the idea of salvation is abandoned of 'I'

एक सज्जन स्वामी रामकृष्ण परमहंस के पास सत्संग के लिए पहुंचे। बातचीत के दौरान उन्होंने पूछा, महाराज, मुक्ति कब होगी? परमहंस जी ने कहा, जब 'मैं' चला जाएगा। 'मैं' दो तरह का होता है- एक पक्का और दूसरा कच्चा।

स्वामी जी ने आगे कहा, जो कुछ मैं देखता, सुनता या महसूस करता हूं, उसमें कुछ भी मेरा नहीं, यहां तक कि शरीर भी नहीं। मैं ज्ञानस्वरूप हूं, यह पक्का मैं है। यह मेरा मकान है, यह मेरा पुत्र है, यह सब सोचना कच्चा मैं है।

स्वामी जी कहते हैं, जिस दिन यह दृढ़ विश्वास हो जाएगा कि ईश्वर ही सब कुछ कर रहे हैं, वह यंत्री है और मैं यंत्र हूं, तो समझो, यह जीवन मुक्त हो गया। जिस प्रकार धनिकों के घर की सेविका मालिकों के बच्चों को अपने ही बच्चों की तरह पालती-पोसती है, पर मन ही मन जानती है कि उन पर उसका कोई अधिकार नहीं है, उसी प्रकार हम सबको बच्चों की तरह प्रेम से पालन-पोषण करते हुए भी विश्वास रखना चाहिए कि इन पर हमारा कोई अधिकार नहीं है।

हमें कई बार भव्य धर्मशाला में कुछ दिन ठहरने का अवसर मिलता है, किंतु उसके प्रति यह भाव नहीं आता कि यह मेरी है, उसी प्रकार जगत को धर्मशाला मानकर यह सोचना चाहिए कि हम कुछ समय के लिए ही इसमें रहने आए हैं। यहां व्यर्थ की मोह, ममता व लगाव रखने से कोई लाभ नहीं होगा।

जब कृष्ण के भक्त को मंदिर के जूठे बर्तन साफ करने पड़े


Sant ji cleaned utensils

ब्रह्मनिष्ठ संत स्वामी दयानंद गिरि शास्त्रों के प्रकांड ज्ञाता थे। वह अक्सर कहा करते थे कि मनुष्य हर प्रकार के अभिमान से दूर रहकर सदैव विनम्रता का व्यवहार करे। एक बार स्वामी जी नाथद्वारा (राजस्थान) पहुंचे।

श्रीनाथ जी के दर्शन के बाद वह भिक्षा (भोजन) प्राप्त करने मंदिर के भंडारे में पहुंचे। वहां भोजनालय का प्रबंधक किसी से कह रहा था, आज बर्तन साफ करनेवाला कर्मचारी नहीं आ पाया है। ऐसी स्थिति में क्या होगा? स्वामी जी ने जैसे ही यह सुना, तो वह जूठे बर्तन साफ करने में जुट गए। भंडारे का व्यवस्थापक और अन्य संतगण उनकी सेवा भावना से बहुत प्रभावित हुए।

उसी शाम मंदिर के सभागार में विद्वानों के बीच संस्कृत में शास्त्र चर्चा का आयोजन था। इसमें अनेक संत और विद्वान भाग ले रहे थे। स्वामी दयानंद गिरि एक कोने में जा बैठे। उन्होंने चर्चा के बीच में खड़े होकर विनयपूर्वक कहा, आप लोग प्रश्न का उच्चारण ठीक ढंग से नहीं कर रहे। उन्होंने शुद्ध उच्चारण भी बता दिया।

मंदिर समिति के अध्यक्ष ने देखा कि यह तो वही संत है, जो थोड़ी देर पहले जूठे बर्तन साफ कर रहा था, तो वह हतप्रभ रह गया। जब उसे पता चला कि वह स्वामी दयानंद गिरि महाराज हैं, तो वह उनके चरणों में गिरकर क्षमा मांगने लगा। स्वामी जी ने कहा, श्रीनाथ जी के भक्तों के जूठे बर्तन धोकर मैंने पूर्व जन्म के संचित पापों को ही धोया है। साधु के लिए कोई भी काम बड़ा या छोटा नहीं होता।




शिवकुमार गोयल
 sabhar :http://www.amarujala.com/

Read more

दर्द से कामुकता का रिश्ता

0



हाथों को बांधकर शरीर को पूरे नियंत्रण में ले आना और फिर जो चाहे करना, मारना कभी चांटों से, कभी चाबुक से, कभी चमड़े की बेल्ट से, यहां तक की पॉलिथीन से मुंह को ऐसे दबाना कि सांस ना आए, लेकिन पम्मी को, ये सब कामोत्तेजक लगता है.
पम्मी के मुताबिक संभोग के दौरान उत्तेजित करने जैसे अनुभव से ये कहीं आगे है, क्योंकि ये दर्द के लेन-देन और ताकत की अभिव्यक्ति का अनोखा खेल है जो कामुकता को एक नए मुकाम तक ले जाता है.

दिल्ली की एक निजी कंपनी में काम कर रहीं, 28 वर्षीय पम्मी कहती हैं, “हम अधीन रहना पसंद करते हैं, इस तरह के बर्ताव से हमें दर्द नहीं होता, बल्कि हम आनंद लेते हैं और हमारे पार्टनर को हर वक्त ज़िम्मेदारी से सोचना होता है कि कहीं हद पार ना हो जाए और मुझे चोट ना लगे.”इस जीवनशैली में एक शख्स ‘डॉमिनेन्ट’ यानि प्रधान है और दूसरा ‘सबमिसिव’ यानि अधीन है. पहले का हक है अपना ज़ोर आज़माना और दूसरे की ज़िम्मेदारी है उस शक्ति प्रदर्शन को बर्दाश्त करना.
इस जीवनशैली के बारे में जानकारी बढ़ाने के लिए पम्मी 'द किंकी कलेक्टिव' नाम की संस्था से जुड़ीं है. ये संस्था भारत के विभिन्न हिस्सों में जाकर लोगों के बीच इस विषय पर जागरुकता बढ़ा रहा है.
इसके अलावा पिछले दिनो इस जीवन शैली पर आधारित किताब "फिफ्टी शेड्स आफ ग्रे" ने पूरी दुनिया में चर्चा बटोरी और दिल्ली में इस किताब को एक ग्रुप ने मंचित भी किया. यौन व्यवहार पर जहां खुल कर बात तक नहीं होती वहां ऐसे विषय को मंचित करना और ऐसी संस्था का गठित होना क्या भारत में एक नई धारा का सूचक है ?

शक्ति इतनी की रोमांच हो पर चोट ना लगे

‘बीडीएसएम’ के नाम से जानी जाने वाली ये जीवनशैली, पम्मी की ही पसंद नहीं है, 48 वर्षीय जया भी दो साल से अपने जीवन को ऐसे ही जी रही हैं.
जया पिछले 28 वर्षों से महिलाओं के मुद्दों पर काम कर रही हैं और यौन हिंसा के खिलाफ हैं, लेकिन अपने जीवन में ऐसे हिंसा को गलत नहीं मानती.

क्या है बीडीएसएम?

  • बॉन्डेज एंड डॉमिनेशन - बन्धन और प्रभुत्व
  • डिसिप्लिन एंड सबमिशन - अनुशासन और आत्मसमर्पण
  • सेडोमैसोकिज़म - दर्द देकर खुशी पाना
जया कहती हैं, “ये हिंसक नहीं है, बल्कि ये जीवनशैली बहुत अलग है, क्योंकि इसका नियम तय है - ज़ोर-आज़माइश आप तभी कर सकते हैं जब दोनों की रज़ामंदी हो - यानि शक्ति का इस्तेमाल उतना जो रोमांच दे पर चोट ना पहुंचाए.”
पम्मी के मुताबिक जिस्मानी रिश्ते का ये रोमांच उनकी रूहानी ज़रूरतें भी पूरी करता है.
दरअसल पम्मी समलैंगिक हैं और खुद को मर्दाना मानती हैं, लेकिन अपने रिश्ते में वो ‘नाचीज़’ होना पसंद करती हैं, “दुनिया मुझे एक मर्द की तरह हमेशा ताकतवर देखना चाहती है, लेकिन जब अपने रिश्ते में मैं खुलकर अपनी पार्टनर को मुझपर हावी होने देती हूं तो ये मुझे अपनी कोमल स्त्रीयोचित भावना को ज़ाहिर करने की आज़ादी देता है.”
पम्मी की जीवनसाथी सारा बताती हैं कि शक्ति का प्रदर्शन सिर्फ संभोग के समय ही काम नहीं करता, अगर युगल चाहे तो ये चौबीसों घंटे झलक सकता है.
उदाहरण के तौर पर सारा कहती हैं, “पैर धोना, पैरों पर गिरकर पूजा करना, कपड़े मेरी पसंद के ही पहनना, खाना खाने से पहले या शौचालय तक जाने से पहले अनुमति लेना, औरों के सामने उसे नीचा दिखाना ये भी इस जीवनशैली का हिस्सा है.”
"ये हिंसक नहीं है, क्योंकि इसका नियम तय है - ज़ोर-आज़माइश आप तभी कर सकते हैं जब दोनों की रज़ामंदी हो - यानि शक्ति का इस्तेमाल उतना जो रोमांच दे पर चोट ना पहुंचाए."
जया, 'द किंकी कलेक्टिव'
ज़ोर-ज़बरदस्ती या रज़ामंदी?
भारत के जाने-माने सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर नारायण रेड्डी बताते हैं कि इस जीवनशैली से जुड़े लोग उनके पास भी आते रहे हैं, हालांकि ये पिछले 20 सालों में उनके पास आए कुल लोगों का एक फीसदी ही होंगे.
उन्होंने कहा कि उनके पास आए मरीज़ों में से ज़्यादातर की उम्र 30 से 50 वर्ष के बीच रही है और ये मध्यम या उच्च वर्ग के परिवारों से थे.
डॉ. रेड्डी के मुताबिक उनके पास जो लोग आए, वो तो अपने पार्टनर की यौन हिंसा की शिकायत लेकर आए - सिगरेट से जलाना, दांत से काटना, सुंई चुभोना, चेन से बांधना, कुत्ते का पट्टा बांधकर घुमाना, नीचा दिखाना - यानि एक व्यक्ति इस तरह की जीवनशैली की चाहत रखता था, और दूसरे को ये नापसंद थी, और इसलिए वो उनके पास मदद मांगने आए.
डॉ रेड्डी कहते हैं, “किसी रिश्ते में काम उत्तेजना अगर सिर्फ चोट या दर्द पहुंचाने से ही पैदा हो तो उसे ‘सेक्सुअली प्रोब्लमाटिक बिहेवियर’ कहेंगे, क्योंकि ये लंबे दौर में परेशानी पैदा कर सकता है, शुरू में इसका नयापन रोमांच पैदा कर सकता है लेकिन कुछ समय में ये शारीरिक दर्द पैदा कर सकता है और मानसिक तौर पर भी चोटिल कर सकता है.”

ब्रितानी लेखिका ई एल जेम्स की ये किताब भारत में भी बहुत लोकप्रिय हुई है.
डॉ रेड्डी ये भी सवाल पूछते हैं कि असल ज़िन्दगी में अपने जीवनसाथी की ऐसी चाहत हां या ना कहने की स्वतंत्रता असल मायने में कितने लोगों को होती है?
पम्मी, सारा, जया और उनके दोस्तों के मुताबिक वो इन शंकाओं से भली-भांति वाकिफ़ हैं, इसीलिए करीब एक साल पहले उन्होंने इस जीवनशैली के बारे में जानकारी बढ़ाने के लिए एक संगठन बनाया – ‘द किंकी कलेक्टिव’.

‘द किंकी कलेक्टिव’

बीडीएसएम जीवनशैली दुनिया के कई देशों में अब कोई छिपी बात नहीं है, लेकिन भारत में इसकी जानकारी इंटरनेट के माध्यम से ही फैली है. इस विचारधारा के लोग और साथियों को ढूंढने में सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों का प्रयोग करते हैं.
भारत में ऐसी जीवनशैली को आज़माने वाले लोगों की संख्या का अंदाज़ा लगाना बहुत मुश्किल है, क्योंकि उनकी सोच को अक्सर ग़लत या मानसिक तौर पर बीमार तक समझा जाता है.
जया बताती हैं कि इंटरनेट बिना पहचान ज़ाहिर किए मिलने का एक बेहतरीन तरीका बनकर उभरा है और दिल्ली में ही एक सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट पर बने ग्रुप के करीब 2,600 सदस्य हैं. ऐसी कई वेबसाइट और ग्रुप हैं जिन्हें गूगल और फेसबुक के ज़रिए आसानी से ढूंढा जा सकता है.
इस जीवनशैली पर बहस और जानकारी के लिए ना कोई आम चर्चा का मंच है ना ही माहौल. जया के मुताबिक इसी कमी को दूर करने के लिए उन्होंने ये संगठन बनाने फैसला किया.
"किसी रिश्ते में काम उत्तेजना अगर सिर्फ चोट या दर्द पहुंचाने से ही पैदा हो तो उसे ‘सेक्सुअली प्रोब्लमाटिक बिहेवियर’ कहेंगे, क्योंकि ये लंबे दौर में परेशानी पैदा कर सकता है,"
डॉ. नारायण रेड्डी, सेक्सोलॉजिस्ट
इसके ज़रिए वो मानसिक रोगों की पढ़ाई कर रहे छात्रों, मानवाधिकार सम्मेलन, महिलाओं के मुद्दों पर काम कर रहे आंदोलनकारियों वगैरह के बीच अपनी बात रख चुके हैं.
सारा बताती हैं, “हमारा मकसद ये भी है कि इस जीवनशैली को अपना रहे लोगों को बता सकें कि इसके अपने कायदे-कानून हैं, मसलन, रज़ामंदी कितनी ज़रूरी है और ताकतवर को ज़िम्मेदार होना आवश्यक है.”
कामसूत्र समेत भारत के पौराणिक ग्रंथों में कामुकता का अध्ययन कर कई किताबें लिख चुकी संध्या मूलचंदानी इस जीवनशैली से परिचित हैं.
वो कहती हैं, “हमारे ग्रंथों में तो ऐसी जीवनशैली का कोई विशिष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन इनका लहज़ा आलोचनात्मक नहीं है, बल्कि इन ग्रंथों की विचारधारा बहुत उदारवादी है यानि मानव व्यवहार में हर तरह की आज़ादी देनेवाली.”
हाल ही में छपी बीडीएसएम जीवनशैली पर आधारित किताब, ‘फिफ्टी शेड्स ऑफ ग्रे’ का उल्लेख देते हुए संध्या कहती हैं कि इस किताब को पढ़ने को लेकर उत्सुकता इस बात का सूचक है कि इस बारे में जानने और परखने की चाहत है, जिसे रोकना नहीं चाहिए.
‘द किंकी कलेक्टिव’ के सदस्यों का मानना है कि जैसे महिलाओं के समान अधिकारों या समलैंगिकों की पहचान से जुड़े मुद्दे शुरुआत में असहज लगते थे, उसी तरह इस जीवनशैली के बारे में भी लोगों के मन में संवेदनशीलता आने में समय लगेगा.
लेकिन क्या भारत के परिवेश में समाज इन सभी मुद्दों को एक तराज़ू पर रख पाएगा?
(कुछ लोगों के नाम बदले गए हैं.)

दिव्या आर्य
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
sabhar :http://www.bbc.co.uk/

Read more

टोपी से तैयार कीजिए धुन

0

ब्रेन म्यूज़िक

शास्त्रीय संगीत की शिक्षा के दौरान मैं ख़ाली पन्ने को घूरती रहती और उम्मीद करती कि कोई शॉर्टकट हो जिससे मैं "सोच" कर संगीत को पेज पर उतार सकूँ.
अब मैं कंप्यूटर पर संगीत तैयार करती हूं और पिक्सल्स के ऊपर पेंसिल घुमाती रहती हूं.

तो प्लीमथ विश्वविद्यालय में एक लैपटॉप को घूरते हुए मैं एक ऐसी तकनीक की जांच करने जा रही हूं जो मेरे संगीत के सपने को हक़ीक़त बनाने का वादा करता है.लेकिन मैं हमेशी ही सोचती थी कि एक दिन मैं सीधे अपने दिमाग से अपने संगीतमय विचारों को रिकॉर्ड कर पाउंगी.
यह परियोजना प्रोफ़ेसर एडुआर्डो मिरांडा के दिमाग़ की उपज है. वह एक संगीतकार हैं जिनकी जीविका का साधन संगीत न्यूरोटेक्नॉलॉजी है.

दिमाग से कंप्यूटर में

एक ब्रेन कैप के माध्यम से उनका उपकरण दिमाग में चल रहे विचारों को पढ़ता है और उन्हें संगीत में बदल देता है.
उनकी योजना चार लोगों के दिमाग से विचार लेकर उन्हें एक साथ पिरोने की है. इसी के आधार पर उनकी नवीनतम संगीत रचना तैयार होगी - जिसका नाम, एक्टिवेटिंग मेमोरी है.
इस संगीत रचना को इसी हफ़्ते के अंत में प्लीमथ में होने वाले साल 2014 पेनिसुला आर्ट्स कंटप्रेरी म्यूज़िक फ़ेस्टिवल में पेश किया जाएगा.
वह मुझे भी अपनी मशीन का इस्तेमाल करने देने को तैयार हो गए और मैं इसके लिए उत्सुक थी.
शोधकर्ता और अभियंता जोएल ईटोन ने मुझे ब्रेन कैप पहनने में मदद की जिसमें से तार और एलेक्ट्रॉड्स निकल रहे थे. उन्होंने मुझे समझाया कि न्यूरोटेक्नॉलॉजी कैसे काम करती है.
जोएल ने मुझे बताया कि दिमाग के पीछे लगा मुख्य इलेक्ट्रॉड मेरे विज़ुअल कॉरटेक्स से दिमाग की तरंगों को चुनेगा जबकि अन्य इलेक्ट्रॉड्स पीछे के शोर को कम करने में मदद करेंगे.
इस उपकरण के काम करने के लिए उपयोगकर्ता को चार रंग बिरंगे आकारों में से किसी एक पर ध्यान केंद्रित करना होता है. यह सब अलग-अलग गति से टिमटिमाते हैं और हर आकार से विद्युत तरंग पैदा होती है.
इस सिग्नल को ब्रेन कैप पकड़ लेता है और कंप्यूटर में भेज देता है. यह उपकरण सही ढंग से तभी काम करता है जब बाक़ी का दिमाग शांत हो. इसलिए लोगों से कहा जाता है कि "दिमाग़ को शांत रखें."
दिमाग़ के इलेक्ट्रिक सिग्नलों को बढ़ाया जाता है और फिर लैपटॉप में डाला जाता है.
ब्रेन म्यूज़िक
जोएल मुझे उत्साहित करते हैं कि मैं आकार को एक ख़ास ढंग से घूरूं - ध्यान केंद्रित और विकेंद्रित करने की तरह. कई बार मुझे स्क्रीन से नज़र हटाकर, फिर वापस देखना होता है - ताकि दिमाग़ ताज़ा हो जाए.
आप इसे सही ढंग से समझ गए तो चयनित आकार जेन के सामने रखी स्क्रीन पर एक संगीत का टुकड़ा भेज देता है. जेन एक व्यावसायिक सेलोवादक हैं, जो उसके बाद मेरे द्वारा भेजे गए संगीत के टुकड़े को बजाती हैं.
शुरू-शुरू में तो यह बहुत मुश्किल था - ध्यान केंद्रित करना, विकेंद्रित करना और आराम करना. जब यह हो गया तो मैं बहुत उत्साहित नहीं हो सकती थी क्योंकि यह मेरे दिमाग़ को सिग्नल पैदा करने की स्थिति से बाहर कर देता.
यह बहुत मुश्किल काम था क्योंकि मुझे यह सारा विचार ही बहुत उत्साहजनक लग रहा था.

अन्य फ़ायदे

यकीनन मैं चाहती थी कि यह सिस्टम सीधे मेरे दिमाग से ही संगीत तैयार कर देता लेकिन ऐसा नहीं था.
सीधे धुन बनाने के बजाय यह पूर्व-निर्मित धुनों में से ही एक चुनता है. आप कह सकते हैं मैं धुन बनाने के बजाए उसे बजाने वाली थी, जहां मेरा दिमाग जेन के सेलो की तरह एक उपकरण बन गया था. लेकिन यह उपकरण इसी काम के लिए तैयार किया गया था.
जब मैंने प्रोफ़ेसर मिरांडा से सीधे धुन बनाने की अपनी इच्छा के बारे में बात की तो उनका कहना था कि शुरुआत में यह बहुत अच्छा लग सकता है लेकिन उन्हें लगता है कि कुछ समय बाद यह उकताहट भरा हो जाएगा.
वह चार चार लोगों के दिमाग से विचार लेंगी और फिर उन्हें मिलाकर संगीत तैयार करेंगी. उन्हें अपूर्ण समाधान की चुनौतियां पसंद हैं.
ब्रेन म्यूज़िक
वह कहते हैं, "इंसान चीजों में हेर-फेर करना पसंद करते हैं - मैं इसे ख़त्म नहीं करना चाहता, मैं संगीतकारों के लिए ज़्यादा परिष्कृत उपकरण बनाना चाहता हूं."
जिन लोगों को चलने-फिरने में दिक्क़त होती है उन लोगों को इस उपकरण से काफ़ी फ़ायदे हैं, इस शुरुआती स्तर पर भी.
कंप्यूटर संगीत शोध के बहुविषयक केंद्र (आईसीसीएमआर) में लॉक्ड-इन सिंड्रॉम (ऐसी समस्या जिसमें मरीज़ होश में रहते हुए भी आंखों के सिवा कोई और अंग नहीं हिला पाता) के मरीज़ों के साथ किए गए प्रयोग में उत्सावहवर्धक नतीजे सामने आए हैं.
फिर भी मेरी उम्मीद के विपरीत इसके आम-आदमी के इस्तेमाल में आने की बात अभी दूर है.
उधर प्रयोगशाला में इस तकनीक पर महारथ हासिल करना बेहद मुश्किल नज़र आ रहा थ. इस प्रक्रिया के दौरान मेरे दिमागी तरंगे तब उल्लेखनीय रूप से कम हो गईं जब सेलो बज रहा था.
दो घंटे की मुश्किल के बाद मैं ठीक ढंग से तरंगें पैदा करने में कामयाब हो गई. जोएल और एडुआर्डो दोनों ने मुझे बताया कि दो घंटे का समय कम है - अक्सर इसमें कुछ दिन लग जाते हैं.
तमाम चुनौतियों और सीमाओं के बावजूद मौजूदा दिमाग-कंप्यूटर-संगीत इंटरफ़ेस से अपने दिमाग के भीतर झांकना मुझे बेहद आदी करने वाला लगा. और मैं यकीनन इस तकनीक के विकास पर नज़र रखूंगी.
हालांकि इतना ज़्यादा ध्यान केंद्रित करने से हुई थकान के बावजूद मैं ख़ुशी-ख़ुशी कई घंटे और स्क्रीन को घूर सकती हूं.

लेकिन संगीतकारों का खाना तैयार था और उन्हें निकलना था इसलिए मैंने अपनी ब्रेन कैप निकाली और चल दी वापस पुराने ढंग से धुन तैयार करने के लिए. sabhar :http://www.bbc.co.uk/

Read more

'कामसूत्र' का विवादास्पद शूटिंग का वीडियो

0

making of kamsutra 3 d

शर्लिन चोपड़ा की नई फिल्‍म कामसूत्र कितनी बोल्ड है इस बात का अंदाजा इस वीडियो से लगता है। 

रुपेश पॉल निर्देशित फिल्‍म कामसूत्र 3डी फिल्म इसी साल मई में रिलीज होने जा रही है। 

यह फिल्म अपने विषय और प्रजेंटेशन दोनों में ही बोल्ड है। फिल्‍म के दो ट्रेलर आ चुके हैं। ट्रेलर से इस बात की झलक मिल चुकी है कि यह फिल्‍म कैसी होगी। 



लेकिन हम आपको इस फिल्‍म की मेकिंग दिखा रहे हैं। मेकिंग देखकर आप चौंक जाएंगे। इस मेकिंग में शर्लिन चोपड़ा बिल्कुल बोल्ड अंदाज में दिख रही हैं। साथ ही बेडरूम दृश्यों को फिल्‍माना भी दिखाया गया है। 

यह फिल्‍म अपनी रिलीज के पहले ही विवादों में है। इस फिल्‍म से जुड़ी पिक्स लीक करने के आरोप में फिल्‍म के निर्देशक रूपेश पॉल शर्लिन को बाहर का रास्ता दिखा चुके हैं। 
saabhar : amarujala.com
देखिए कामसूत्र की मेकिंग 

http://www.youtube.com/watch?feature=player_embedded&v=heVknCvJqyc#t=19

Read more

मिल गया असली भूत माही गिल को

0

know about mahie gill's spooky experience


अभिनेत्री माही गिल को असली का भूत मिल गया। यह मामला एक फिल्‍म की शूटिंग का है। 

कई बार अच्छे कलाकार फिल्‍म के पात्र में इतनी गहराई से उतर जाते हैं कि उन्हें हर वक्त उस पात्र में ही खोए रहने का भ्रम बना रहता है। 

लगता है कि कुछ ऐसा ही अभिनेत्री माही गिल के साथ हुआ। माही गिल इन दिनों एक भुतही फिल्‍म की शूटिंग कर रही हैं। 

'गैंग्स ऑफ घोस्ट' नाम वाली इस फिल्‍म की इन दिनों आऊटडोर शूटिंग हो रही है। फिल्‍म का निर्देशन सतीश कौशिक कर रहे हैं। 

हुआ यूं कि एक रात माही गिल को एहसास हुआ कि उन्हें प्रेत की कोई छाया दिखाई दी। फिर क्या वह जोर-जोर से चीख उठीं। 

रात के सन्नाटे में माही की इस चीख से हड़कंप मच गया। लोग वहां पहुंचे तो पता चला कि माही को वहां कोई भूत दिख गया। 

इसके पहले कुछ ऐसा ही किस्सा बिपाशा बसु के साथ ऊटी में हो चुका है। वह उस समय 'आत्मा' फिल्म की शूटिंग कर रहीं ‌थीं। sabhar:http://www.amarujala.com/

Read more

सत्यवादी को मृत्यु भी नहीं डराती

0

Nation depend on truth

जाबालि मुनि ने भगवान श्रीराम से एक बार प्रश्न किया, राष्ट्र किस तत्व पर आधारित है?

प्रभु श्रीराम ने कहा, तस्मांत सत्यात्मकं राज्यं सत्ये लोकः प्रतिष्ठितः। अर्थात राष्ट्र सत्य पर आश्रित रहता है। सत्य में ही संसार प्रतिष्ठित है। हे मुनि, जिस राष्ट्र की नींव सत्य और संयम पर आश्रित है, उसका शासक व प्रजा हमेशा सुखी रहते हैं। असत्य-कपट का सहारा लेने वाले कभी संतुष्ट व सुखी नहीं रह सकते।

भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को सत्य का स्वरूप समझाते हुए कहा था, सत्य सनातन धर्म है, सत्य सनातन ब्रह्म है। चारों वेदों का सार रहस्य सत्य है।

ऋग्वेद में कहा गया है कि सत्कर्मशील व्यक्ति को सत्य की नौका पार लगाती है। दुष्कर्मी, संयमहीन व छल-कपट करने वाले व्यक्ति की नौका मझधार में डूबकर उसके जीवन को निरर्थक कर देती है।

टॉलस्टाय ने लिखा है, जिसने सत्य का संकल्प ले लिया और सदाचार का मार्ग अपना लिया, वही हर प्रकार के भय, कष्टों से मुक्त रहकर ईश्वर व मनुष्यों का प्रिय बन सकता है। सत्यवादी को मृत्यु भी नहीं डराती।

महर्षि चरक ने आचार रसायन में कहा है, सत्यवादी, क्रोध रहित, मन, कर्म व वचन से अहिंसक तथा विनय के पालन से मानव शारीरिक, मानसिक व आत्मिक रोगों से मुक्त रहता है। उन्होंने इसे सदाचार रसायन कहा है। सत्य-सदाचार जैसे तत्वों को त्यागने के कारण ही मानव अनेक रोगों का शिकार बनता है sabhar ; http://www.amarujala.com/

Read more

श्रद्धा से मनुष्य को प्रेम, रस और आनंद मिलता है

0


with trust worship is fruitful

सभी धर्मशास्त्रों में श्रद्धा का महत्व प्रतिपादित किया गया है। कहा गया है कि श्रद्धा-निष्ठा के साथ किया गया प्रत्येक सत्कर्म फलदायक होता है। इसलिए कहा गया है कि श्रद्धां देवा यजमाना वायुगोपा उपासते। श्रद्धां हृदस्य याकूत्या श्रद्धया विन्दते वसु। अर्थात देवता, संतजन, विद्वान, यजमान, दानशील, बलिदानी सब श्रद्धा से कर्म की उपासना करते हैं, इसलिए सुरक्षित रहते हैं।

श्रद्धा को सुमतिदायिनी, कामायनी, कात्यायनी बताकर उसकी उपासना की गई है। वैदिक ऋचा में कहा गया है, हे परमप्रिये श्रद्धे, तेरी कृपा से मैं ऐसा व्यवहार करूं, जिससे संसार का उपकार हो सके। हे सुमतिदायिनी श्रद्धे, मैं जो कुछ आहुति, दान व बलिदान करूं, उसे उपयोगी और सर्वहितकारिणी बना।

हे कामायनी श्रद्धे, मेरी अनासक्त कामना है कि मेरे कृत्यों से दान और बलिदान की प्रेरणा उदित होती रहे। हृदय से जब श्रद्धा की उपासना होती है, तब अनंत ऐश्वर्य अनायास ही प्राप्त होने लगते हैं।

ऋग्वेद में कहा गया है, श्रद्धया अग्निः समिध्यते। यानी श्रद्धा से ऐसी अग्नि प्रदीप्त होती है, जो मनुष्य को प्रेम, रस, आनंद और अमृत प्रदान कर उसका लोक-परलोक सफल बनाती है। श्रद्धा ही वृद्धजनों, माता-पिता, गुरु के प्रति कर्तव्यपालन करने, मातृभूमि के लिए प्राणोत्सर्ग करने, समाज व धर्म की सेवा में संलग्न होने की प्रेरणा का स्रोत है। sabhar :http://www.amarujala.com/

Read more

कृष्ण ने ऐसा काम किया कि राधा और गोपियां कृष्ण से दूर-दूर रहने लगी

0

krishna kund govardhan radha krishna


भगवान श्री कृष्ण और राधा का प्रेम अनोखा है। दोनों एक दूसरे के हृदय में रहते हैं। लेकिन एक बार श्री कृष्ण ने ऐसा काम किया कि राधा और गोपियां कृष्ण से दूर-दूर रहने लगी। राधा ने कृष्ण से यह भी कहा कि मत छूना मुझे।

इस घटना के बाद कृष्ण ने जो किया उसकी निशानी आज भी गोवर्धन पर्वत की तलहटी में कृष्ण कुंड के रुप में मौजूद है। इस कुंड के निर्माण का कारण राधा कृष्ण यह संवाद माना जाता है जब राधा ने कृष्ण को अपना स्पर्श करने से मना कर दिया था।

इसकी वजह यह थी कि, भगवान श्री कृष्ण ने कंश के भेजे हुए असुर अरिष्टासुर का वध कर दिया था। अरिष्टासुर बैल के रुप में व्रजवासियों को कष्ट देने आया था। बैल की हत्या करने के कारण राधा और गोपियां कृष्ण को गौ का हत्यारा मान रही थी।

कृष्ण ने राधा को खूब समझाने का प्रयास किया कि उसने बैल की नहीं बल्कि असुर का वध किया है। कृष्ण के समझाने के बाद भी जब राधा नहीं मानी तो श्री कृष्ण ने अपनी ऐड़ी जमीन पर पटकी और वहां जल की धारा बहने लगी।

इस जलधारा से एक कुंड बन गया। श्री कृष्ण ने तीर्थों से कहा कि आप सभी यहां आइए। कृष्ण के आदेश से सभी तीर्थ राधा कृष्ण के सामने उपस्थिति हो गए। इसके बाद सभी कुंड में प्रवेश कर गए। श्री कृष्ण ने इस कुंड में स्नान किया और कहा कि इस कुंड में स्नान करने वाले को एक ही स्थान पर सभी तीर्थों में स्नान करने का पुण्य प्राप्त हो जाएगा। sabhar :http://www.amarujala.com/

Read more

कृष्णन आज देश इन्हें हीरो कहता है

0

जब कृष्णन है तो कोई भूखे पेट क्यों सोए,कलियुग का 'कृष्ण'...

नई दिल्ली. क्या कोई ऐश्वर्य भरी जिंदगी छोड़ सड़क की धूल छानने की चाहत रखना चाहेगा? क्या कोई अपने सपनों को रौंदना चाहेगा? अधिकांश जवाब 'ना' ही मिलेगा। मगर, ऐसा हुआ है। नारायण कृष्णन। जी हां, आज के समय का बड़ा चेहरा। ये वही शख्सियत हैं, जिन्होंने ऐश्वर्य भरी जिंदगी छोड़कर कांटों भरी राह को गले लगाया है।
 
2002 में हुए एक वाकये ने मदुरई (तमिलनाडु) निवासी कृष्णन की जिंदगी हमेशा के लिए बदल कर रख दी। आज देश इन्हें हीरो कहता है
 
2003 में कृष्णन ने 'अक्षय' नाम से मुनाफा न कमाने वाले ट्रस्ट की शुरुआत की। अब उनके जीवन का एक ही मकसद है, गरीब भूखे पेट न सोए। कृष्णन के मेहमानों की लिस्ट में गरीब, बेसहारा और बेघर लोग शामिल हैं। 34 वर्षीय कृष्णन अब तक मदुरई के एक करोड़ से भी ज्यादा लोगों को सुबह का नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात का खाना खिला चुके हैं। वह नि:स्वार्थ भाव से जनसेवा में लगे हुए हैं। पूरे देश को उनपर गर्व है। लेकिन उनकी यही जनसेवा अब मुद्दा बन चुकी है। मुद्दा, गरीबी-अमीरी के बीच के खाई का। मुद्दा, देश में लगातार बढ़ रहे रईसों और उसी अनुपात में बढ़ती गरीबी का। क्योंकि भारत को अरबपतियों का देश भी कहा जाता है। बानगी के तौर पर दुनिया का सबसे महंगा घर भी भारत में ही है।  

जब कृष्णन है तो कोई भूखे पेट क्यों सोए,कलियुग का 'कृष्ण'...

ऐसे बदल गई कृष्णन की जिंदगी
 
कृष्णन एक बेहतरीन शेफ हैं। वह इसके लिए अवार्ड तक जीत चुके हैं। उन्हें स्विट्जरलैंड के फाइव स्टार होटल ने शानदार नौकरी ऑफर की। लेकिन यूरोप जाने से पहले ही एक ऐसा वाकया हुआ, जिसने उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल कर रख दी। कृष्णन बताते हैं 'मैंने सड़क किनारे एक बूढ़े इंसान को कचरे में खाना ढूंढते देखा। वह भूख से तड़प रहा था। उस इंसान को इतनी जोरों की भूख लगी थी कि उसने कचरा तक खा लिया। यह देख मुझे बेहद तकलीफ हुई। मैं फौरन पास के होटल गया और वहां से इडली खरीद कर लाया। फिर उन्हें खाने को दिया। मैंने आज तक इतनी तेजी से किसी को खाते नहीं देखा। खाते समय उसकी आंखों से आंसू झरने लगे। मगर वह खुशी के आंसू थे। यही मेरे जीवन का निर्णायक मोड़ था।'
 जब कृष्णन है तो कोई भूखे पेट क्यों सोए,कलियुग का 'कृष्ण'...
कृष्णन बेसहारा और निशक्तों के लिये आशियाना भी बनवा रहे हैं ताकि इन लोगों को सड़कों पर न भटकना पड़े। आइए एक नजर डालते हैं उनके रोजमर्रा के खर्चों पर...
 
- 400 लोगों का भोजन (खुद के हाथों        बना शाकाहारी भोजन खिलाते हैं)
- दिन में तीन बार
- अगर भूखा व्यक्ति कमजोर है तो अपने हाथों से उसे खाना खिलाते हैं
- औसतन 200 किमी रोज का आनेजाने का खर्च 
(एक बार के भोजन का औसत व्यय 5000 रुपये, मतलब प्रतिदिन 15,000 रुपये)

जब कृष्णन है तो कोई भूखे पेट क्यों सोए,कलियुग का 'कृष्ण'...


देश में केवल 27 करोड़ गरीब: सरकार
 
देश में गरीबी और अमीरी के बीच खाई लगातार बढ़ती जा रही है। मगर सरकार का ध्यान सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी पर है। हाल ही में गुजरात सरकार द्वारा जारी गरीबी के आंकड़ों पर सियासत गरमा गई थी। खूब चला आरोप-प्रत्यारोप का दौर। लेकिन कैसे घटेगी गरीबी इस पर किसी ने चर्चा नहीं की। सरकार ने गरीबों का मखौल उड़ाने के अलावा और कुछ नहीं किया है।गरीबी के आंकड़ों पर नजर डालें तो केंद्र सरकार का कहना है कि देश में गरीबों की संख्या 2004-05 के 40.74 करोड़ लोगों से घटकर 2011-12 में 27 करोड़ ही रह गई है। मतलब, देश में केवल 27 करोड़ लोग ही गरीब हैं। अगर ऐसा है तो सड़कों पर जो बेसहारा और निशक्तजन भटकने को मजबूर हैं उनकी कौन सुध लेगा। ये बड़ा सवाल है। खैर गरीबी को मापने के लिए सरकार के पास कौन सा पैमाना है हम उसकी बात नहीं करेंगे। गरीबी को लेकर जो ताजा आंकड़ा सामने है, वो एनएसएसओ की ओर से कराए गए सर्वे के 68वें दौर में सामने आया है। 

sabhar : bhaskar.com



Read more

रविवार, 9 फ़रवरी 2014

कैमरे के अंदर बैठा हुआ है भूत

0

जानी-पहचानी है ये तस्वीर


जानी-पहचानी है ये तस्वीर

इस तस्वीर को देखकर आपको ऐसा नहीं लगा होगा कि आप ये पहली बार देख रहे हैं। आज तक जितनी बार भी भूतों और आत्माओं के साक्ष्य या कैमरे में कैद होने का जिक्र हुआ है, इस तस्वीर को भी उदाहरण के तौर पर लिया गया है।पर क्या आप जानते हैं ‌कि ये तस्वीर कब की है? ये तस्वीर साल 1930 में ली गई थी। लेकिन आश्चर्य ये है कि तस्वीर का भूत आज भी कैमरे में कैद है।
क्या है पूरा मामला?


क्या है पूरा मामला?

इतिहासकार मिशाला हल्मे को उनके ब्वॉयफ्रेंड ने उपहार में एक कैमरा दिया था। ये वो ही कैमरा है जिससे ये 'हैप्पी स्नैप' ली गई थी।
पर आश्चर्य और चौंकाने वाली बात ये है कि इस कैमरे में आज भी इस तस्वीर की निगेटिव है। जिसमे चार तस्वीरें इतिहासकार मिशाला को वो निगेटिव मिल गई है और अब वो इसमें मौजूद लोगों को पहचानने के लिए प्रयासरत हैं।
of 4
एजीएफए बॉक्स कैमरे से ली गई है तस्वीर


एजीएफए बॉक्स कैमरे से ली गई है तस्वीर

तस्वीर तो आपे देख ही रखी होगी। इस तस्वीर में कुछ रिश्तेदारों या फिर दोस्तों को एक स्टेशन के पास खड़ा देखा जा सकता है। 

इसमें पीछे की ओर एक शख्स है, जिसके बारे में ऐसी मान्यता है कि वो भूत है। ये कैमरा मिशाला के ब्वॉयफ्रेंड ने उन्हें दिया है। जिसे उन्होंने एंटीक सामानों की एक दुकान से खरीदा है। 

क्‍या है कैमरे का रहस्य?

क्‍या है कैमरे का रहस्य?

वो बताती हैं कि ये कैमरा जर्मनी में बना हुआ है। जो करीब 1930 और 1940 के दौरान बनाया गया है?

डेली मेल के अनुसार, कैमरे से करीब आठ फोटो की निगेटिव मिली है लेकिन उनमें से चार की ही तस्वीर सही बन पाई है। उन्हीं में से एक तस्वीर ये भी है, जिसके संदर्भ में कहा जाता है कि पीछे खड़ा शख्स एक साया है।
मिशाला फिलहाल तो पूरे मामले की तहकीकात करके ही किसी निर्णय पर पहुंचेंगी और तभी इस तस्वीर वाले भूत के रहस्य का पता चल सकेगा। sabhar :http://www.amarujala.com/



Read more

Ads

 
Design by Sakshatkar.com | Sakshatkartv.com Bollywoodkhabar.com - Adtimes.co.uk | Varta.tv