शुक्रवार, 24 जून 2022
गुरुवार, 23 जून 2022
विश्व की आने वाली मंदी पर गिरजेश वशिष्ट की समीक्षा
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पति को कैसे बनाया जाए 'जोरू का गुलाम'?
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बुधवार, 22 जून 2022
दुनिया में आ सकती है मंदी का दौर
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शनिवार, 18 जून 2022
मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए देश का अग्रणी संस्थान है सीजीसी लांडरां
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इंजीनियरिंग की सबसे पुरानी शाखाओं में से एक है मैकेनिकल इंजीनियरिंग। आधुनिक समय में भी इसकी महत्ता बरकरार है, बल्कि समय के साथ इसकी डिमांड और बढ़ रही है। स्टीम इंजन के जमाने से लेकर आज की आधुनिक ऑटोमेशन-समर्थित मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमोबाइल सेक्टर में मैकेनिकल इंजीनियरिंग की मांग कायम है और बढ़ रही है। यही वजह है कि इंजीनियरिंग फील्ड में जाने वाले छात्रों के लिए मैकेनिकल इंजीनियरिंग एक पसंदीदा विषय रहा है।
मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए देश का सर्वश्रेष्ठ संस्थान चुनने की बात आती है तो निर्विवाद रूप से चंडीगढ़ ग्रुप ऑफ कॉलेज लांडरां सबसे अग्रणी है। सीजीसी लांडरा (पंजाब), न केवल स्टूडेंट्स को अभिनव आइडिया के साथ उद्योग और मार्केट की जरूरतों और डिमांड के अनुरूप तैयार करता है बल्कि दुनिया भर में प्रमुख मैकेनिकल इंजीनियरिंग कंपनियों में प्लेसमेंट के हिसाब से नवीनतम तकनीकी और व्यवहारिक अनुभव भी प्रदान करता है। इसकी वजह से स्टूडेंट्स मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी जनरेशन, ट्रांसपोर्टेशन, वेस्ट मैनेजमेंट, हेल्थ और एनवायरमेंट जैसे विभिन्न क्षेत्रों में अपना योगदान देने में समर्थ होते हैं। सीजीसी लांडरां की यही विशेषताएं उसे देश के टॉप मैकेनिकल इंजीनियरिंग कॉलेजों में शुमार करती हैं। sabhar https://www.bhaskar.com/career/news/cgc-landran-is-the-countrys-leading-institute-for-the-study-of-mechanical-engineering-129946954.htm
क्रिप्टोकरेंसी में इन्वेस्ट करने वालों को अब हर रोज नया झटका लग रहा है
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क्रिप्टोकरेंसी में इन्वेस्ट करने वालों को अब हर रोज नया झटका लग रहा है. वजह, कभी इन्वेस्टमेंट पर रिटर्न के मामले में बुलंदियों को छू रही मशहूर क्रिप्ट... https://www.aajtak.in/business/utility/story/cryptocurrency-investors-making-loss-bitcoin-down-20k-dollar-mark-ethereum-decline-too-tutk-1484140-2022-06-18
गुरुवार, 9 जून 2022
संगीत चिकित्सा का साधन"..
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शनिवार, 21 मई 2022
ध्यान की ताकत
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*ध्यान की ताकत*
जब 100 लोग एक साथ साधना करते हैं तो उत्पन्न लहरें 5 कि.मी. तक फैलती हैं और नकारात्मकता नष्ट कर सकारात्मकता का निर्माण करती हैं।
आइंस्टाईन नें वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कहा था कि एक अणु के विघटन से लाखों अणुओं का विघटन होता है, इसीको हम अणु विस्फोट कहते है। यही सूत्र हमारे ऋषि, मुनियों ने हमें हजारो साल पहले दिया था।
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आज पृथ्वी पर केवल 4% लोग ही ध्यान करते है लेकिन बचे 96% लोगों को इसका पॉजिटिव इफेक्ट होता है।
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अगर हम लगातार 90 दिनों तक ध्यान करे तो इसका सकारात्मक प्रभाव हमारे और हमारे परिवार पर दिखाई देगा।
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अगर पृथ्वी पर 10% लोग ध्यान करने लगें तो पृथ्वी पर विद्यमान लगभग सभी समस्याओं को नष्ट करने की ताकत ध्यान में है।
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उदाहरण के लिए हम बात करें तो महर्षि महेश योगी जी ने सन् 1993 में वैज्ञानिकों के समक्ष यह सिद्ध किया था।।
हुआ यूं कि उन्होने वॉशिंगटन डी सी में 4000 अध्यापको को बुलाकर एक साथ ध्यान (मेडिटेशन) करने को कहा और चमत्कारिक परिणाम यह था कि शहर का क्राईम रिपोर्ट 50% तक कम हुआ पाया गया।
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वैज्ञानिकों को कारण समझ नहीं आया और उन्होनें इसे`महर्षि इफेक्ट" नाम दिया।
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यह ताकत है ध्यान में 🕉🧘♂️🧘♀️🕉
*If interested in shaktipat diksha Or Kundalini awakening please msg me on my whatsApp no. +919450220221( only serious seekers)*
शिव जी भस्म क्यों लगाते हैं
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शिव जी भस्म क्यों लगाते हैं
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महादेव जी को एक बार बिना कारण के किसी को प्रणाम करते देखकर पार्वती जी ने पूछा आप किसको प्रणाम करते रहते हैं?
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शिव जी ने अपनी धर्मपत्नी पार्वती जी से कहते हैं की, हे देवी! जो व्यक्ति एक बार ‘राम’ कहता है उसे मैं तीन बार प्रणाम करता हूं।
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पार्वती जी ने एक बार शिव जी से पूछा आप श्मशान में क्यूं जाते हैं और ये चिता की भस्म शरीर पे क्यूं लगते हैं?
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उसी समय शिवजी पार्वती जी को श्मशान ले गए। वहां एक शव अंतिम संस्कार के लिए लाया गया। लोग ‘राम’ नाम सत्य है कहते हुए शव को ला रहे थे।
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शिव जी ने कहा की देखो पार्वती इस श्मशान की ओर जब लोग आते हैं तो ‘राम’ नाम का स्मरण करते हुए आते हैं।
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और इस शव के निमित्त से कई लोगों के मुख से मेरा अतिप्रिय दिव्य ‘राम’ नाम निकलता है उसी को सुनने मैं श्मशान में आता हूँ...
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और इतने लोगो के मुख से ‘राम’ नाम का जप करवाने में निमित्त बनने वाले इस शव का मैं सम्मान करता हूँ, प्रणाम करता हूँ, और अग्नि में जलने के बाद उसकी भस्म को अपने शरीर पर लगा लेता हूँ।
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‘राम’ नाम बुलवाने वाले के प्रति मुझे इतना प्रेम है।
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एक बार शिवजी कैलाश पर पहुंचे और पार्वती जी से भोजन मांगा। पार्वती जी विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर रहीं थी।
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पार्वती जी ने कहा अभी पाठ पूरा नही हुआ, कृपया थोड़ी देर प्रतीक्षा कीजिए।
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शिव जी ने कहा की इसमें तो समय और श्रम दोनों लगेंगे।
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संत लोग जिस तरह से सहस्र नाम को छोटा कर लेते हैं और नित्य जपते हैं वैसा उपाय कर लो।
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पार्वती जी ने पूछा वो उपाय कैसे करते हैं? मैं सुनना चाहती हूँ।
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शिव जी ने बताया, केवल एक बार ‘राम’ कह लो तुम्हे सहस्र नाम, भगवान के एक हजार नाम लेने का फल मिल जाएगा।
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एक ‘राम’ नाम हजार दिव्य नामों के समान है। पार्वती जी ने वैसा ही किया।
जय श्री राम🙏🙏
हर हर महादेव 🙏🙏
#by_शर्मा_जी_कहियो https://www.facebook.com/profile.php?id=100048692481109
रविवार, 23 जनवरी 2022
तँत्र क्यो महत्वपूर्ण है
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तंत्र कहता है ”जब तक तुम स्वयं प्रकाश से नहीं भर जाते तुम दूसरों को प्रकाशित होने में कैसे सहायक होओगे?” स्वार्थी हो जाओ–तभी, केवल तभी परार्थी हो सकोगे; नहीं तो परार्थ, परोपकार की धारणा मूर्खतापूर्ण है।
आनंदित होओ–तभी तुम दूसरों को आनंदित होने में सहायता दे सकोगे। अगर तुम उदास हो दुखी हो, कड़वाहट से भरे हो, तुम निश्चित ही दूसरे के प्रति हिंसक हो जाओगे और दूसरों के लिए दुख पैदा करोगे।”
स्वयं को प्रसन्न रखने में क्या बुराई है? सुखी होने में क्या बुराई है? अगर कुछ बुराई है तो वह तुम्हारे दुखी होने में है क्योंकि दुखी व्यक्ति अपने चारों ओर दुख की तरंगें निर्मित कर लेता है।
तंत्र कामुकता नहीं सिखाता। वह तो केवल यही कहता है कि काम सुख का स्रोत हो सकता है। एक बार जब तुम्हें उस सुख का पता चल जाता है तो तुम आगे बढ़ सकते हो, क्योंकि अब तुम सत्य की भूमि पर खड़े हो।
व्यक्ति को सदा काम में नहीं अटके रहना है। बल्कि काम का तालाब में कूदने के लिए जंपिंग बोर्ड की तरह उपयोग किया जा सकता है। तंत्र का यही अभिप्राय है: ”तुम इसे जंपिंग बोर्ड समझो।”
और जब एक बार तुम्हें काम-सुख का अनुभव हो जाए तुम समझ सकोगे कि रहस्यदर्शी किस की बात करते रहे हैं–एक परम, एक ब्रह्मांडीय काम-कृत्य की। मीरा नाच रही है। तुम उसे समझ न पाओगे।
तुम उसके गीतों को भी समझ न पाओगे। वे कामुकता पूर्ण हैं। ऐसा होगा ही, क्योंकि आदमी के जीवन में काम-कृत्य ही एक ऐसा कृत्य है जिसमें अद्वैत की प्रतीति होती जिसमें तुम एक गहन अनुभव करते हो।
जिसमें अतीत मिट जाता है और भविष्य खो जाता है और बचता केवल वर्तमान–केवल सत्य वास्तविक क्षण।उन सभी रहस्यदर्शियों ने जिन्हें परमात्मा के साथ संपूर्ण अस्तित्व के साथ एक हो जाने की अनुभूति हुई है।
उन्होंने अपनी अनुभूति को अभिव्यक्त करने के लिए काम प्रतीकों का उपयोग किया है। और कोई भी प्रतीक इतने निकट नहीं हैं। काम केवल प्रारंभ है अंत नहीं। लेकिन अगर तुम प्रारंभ को ही चूक गए ।
तो अंत को भी चूक जाओगे। और तुम अंत तक पहुंचने के लिए आरंभ से बच नहीं सकते। तंत्र कहता है ”जीवन को उसके प्राकृतिक रूप में, सत्य रूप में ग्रहण करो। अप्राकृतिक झूठ मत होओ।
काम-वासना एक गहनतम संभावना है, उसका उपयोग करो। वास्तव में, सभी नैतिकताएं प्रसन्नता-विरोधी हैं। कोई व्यक्ति प्रसन्न है तो तुम्हें लगता है कि जरूर कहीं कुछ गलत है। जब कोई उदास है तब सब ठीक है।
हम एक स्नायु-रोग-ग्रस्त समाज में जीते है जहां हर व्यक्ति उदास है। जब तुम उदास हो ,दुखी हो, तब सब प्रसन्न है; क्योंकि अब सबको तुमसे सहानुभूति प्रकट करने का अवसर मिलेगा।
जब तुम प्रसन्न हो तो उनको समझ नहीं आएगा कि वे क्या करें? जब कोई तुमसे सहानुभूति प्रकट करता है तब उसका चेहरा देखना। एक सूक्ष्म चमक चेहरे पर आ जाती है। वह सहानुभूति दिखाते समय प्रसन्न है।
अगर तुम खुश हो, तब कोई संभावना नहीं।तुम्हारी प्रसन्नता दूसरों को उदास कर देती है। यह स्नायुरोग न्यूरोसिस है। इसका आधार ही पागलपन है। तंत्र कहता है ”तुम जो हो, प्रामाणिक रूप से वही हो जाओ।
तुम्हारी प्रसन्नता बुरी नहीं अच्छी है। वह पाप नहीं। केवल उदासी पाप है केवल दुखी होना पाप है। प्रसन्न होना पुण्य है क्योंकि एक प्रसन्न और प्रफुल्लित व्यक्ति ही दूसरों के लिए दुख पैदा नहीं करेगा।
केवल प्रफुल्लित और प्रसन्न व्यक्ति ही दूसरों की प्रसन्नता के लिए भूमि तैयार कर सकता है।” तंत्र विज्ञान है। तंत्र कहता है ”पहले जानो कि यथार्थ क्या है वास्तविकता क्या है आदमी क्या है?
और पहले से मूल्य निर्धारित मत करो और आदर्श मत स्थापित करो पहले उसे जानो जो है। जो होना चाहिए उसके संबंध में मत सोचो, जो है केवल उसके संबंध में सोचो।”
और जब एक बार उसे जान लिया जाता है जो है तब तुम उसे रूपांतरित भी कर सकते हो। अब तुम रहस्य समझ गए। तंत्र कहता है ”काम के विरुद्ध जाने की चेष्टा मत करो
अगर तुम काम के विरुद्ध जाकर ब्रह्मचर्य को, साधने की कोशिश करते हो तो यह असंभव है। यह मात्र जादू की भांति है। बिना यह जाने कि काम-ऊर्जा क्या है बिना यह जाने कि काम-वासना की उत्पत्ति किस प्रकार होती है। sabhar tantra shadana kundalni sakti Facebook wall
बिना उसकी प्रकृति की गहराई में गए बिना उसके रहस्य को जाने। तुम ब्रह्मचर्य का एक आदर्श अवश्य स्थापित कर सकते हो लेकिन तुम क्या करोगे?” तुम केवल दमन करोगे।
और जो व्यक्ति इसका दमन करता है वह उस व्यक्ति से अधिक कामुक है जो इसका भोग करता है। क्योंकि भोग से ऊर्जा शांत हो जाती है क्योंकि दमन से वह तुम्हारे शरीर-तंत्र में निरंतर संचार करती रहती है।