- मूत्र उत्सर्जन : हम यह सोचते हैं कि पेशाब करना एक ऐच्छिक फंक्शन है। ब्रेन मूत्र की पेशी को नियंत्रित करता है। हालांकि कठोर खांचा मशल्स को कड़ा कर देता है, इससे पेशाब नहीं होती है, लेकिन जब मौत के कुछ देर बाद मशल रिलैक्स होती है तो मौत के बाद भी पेशाब हो जाती है।
-पाचन : हम यह भूल जाते हैं कि हमारे शरीर में कई जीव भी होते हैं। मौत होने के बाद भी बैक्टीरिया शरीर में जिंदा बने रहते हैं, इनमें से बहुत से पैरासाइटिक भी होते हैं। ये डाइजेशन में हमारी मदद करते हैं। मौत के बाद भी ये अपना काम करते रहते हैं। बहुत से पैरासाइट आंतों के अंदर होते हैं और गैस बनाते हैं।
शिश्न का खड़ा होना और वीर्य का स्राव होना : जब हार्ट बॉडी के अंदर शरीर के खून को रोकता है तो यह एक छोटे से एरिया में इकट्ठा हो जाता है। मौत के बाद कभी-कभी कैलशियम के लिए झिल्ली पारगम्य हो जाती है और सेल्स इतनी अधिक नहीं फैलती हैं, जितना आयन (एक मॉलीक्युलर जो इलेक्ट्रिकली चार्ज होता है) बाहर आते हैं। इनके बाहर आने के कारण मसल सिकुड़ती हैं और इससे मौत के बाद शरीर कड़ा हो जाता है और इससे स्खलन हो सकता है।
मांसपेशियों (मसल)में हरकत : ब्रेन की डेथ होने के बाद भी शरीर के अन्य हिस्सों में स्नायु संस्थान सक्रिय हो सकता है। मौत के बाद भी शरीर की हलचल को अक्सर देखा गया है। दरअसल नर्व स्पाइनल कॉर्ड को सिग्नल भेजती हैं न कि ब्रेन को। इससे मांसपेशियों में हरकत और ऐंठन दिखाई देती है
आवाज निकलना : मौत होने के बाद शरीर की सभी मांसपेशियां कड़ी हो जाती हैं, इसमें वोकल कॉर्ड्स (स्वर तंतु) भी शामिल है। मौत होने पर मांस पेशियां कठोर होती हैं इससे वोकल कॉर्ड्स के अकडऩे से भी डेडबॉडी से एक डरावनी आवाज निकलती है। लोगों को कई बार मृत शरीर से कराहने, आह, और चरमराने की आवाजें सुनाई देती हैं।
- जन्म देना : कभी बहुत ही रेयर घटनाक्रम में देखा गया है कि गर्भवती महिलाएं मौत के बाद भ्रूण बाहर आ जाता है। यह शरीर के अंदर गैस बनने और मांस के साफ्ट होने के कारण होता है। इस तरह की घटनाएं बेहद दुर्लभ हैं और कई बार अफवाहें भी आती रहती हैं। sabhar : bhakar.com
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