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बुधवार, 5 फ़रवरी 2014

विदेशी लड़कियों को रेप से बचाने के लिए मजदूर ने दिखाई आम आदमी की ताकत

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विदेशी लड़कियों को रेप से बचाने के लिए अकेले लड़ गया मजदूर

जोधपुर. खुद को गाइड बताकर दो युवक फ्रांसीसी युवतियों को मंडोर की छतरियां दिखाने के बहाने सुनसान इलाके में ले गए। वे युवतियों से दुष्कर्म का प्रयास करने लगे लेकिन वहां काम कर रहे मजदूर पुखराज राजपूत को कहानी समझ में आ गई। उसने दोनों बदमाशों को पत्थर फेंक-फेंक कर पहले भगाया। फिर फोन पर अपने साथियों को सूचना दी। इस बीच दोनों बदमाश सिटी बस में जा छिपे। साथियों ने मंडोर उद्यान के बाहर सिटी बस से दोनों को दबोच लिया। फिर अन्य लोग भी आ जुटे और बदमाशों को पुलिस के हवाले कर दिया। मंडोर थाना पुलिस ने दोनों के खिलाफ दुष्कर्म के प्रयास का मामला दर्ज किया है।

पुलिस के अनुसार दो फ्रांसीसी युवतियां मंडोर उद्यान घूमने आई थीं। वहां बिहार निवासी मुबारक (22) पुत्र शम्मालुदीन व जोधपुर के जीशान खिलजी (21) पुत्र बरकतुल्लाह ने युवतियों से बातचीत कर खुद को गाइड बताया। उन्हें मंडोर की प्राचीन छतरियों का महत्व बताया। युवतियां झांसे में आ गईं।

पुखराज राजपूत, मजदूर ने दिखाई आम आदमी की ताकत

जो पत्थर तोड़कर आजीविका चलाते हैं। उन्हीं पत्थरों को हथियार बनाया और दो विदेशी युवतियों को दुष्कर्म से और शहर को बदनामी से बचा लिया।

युवतियां चिल्लाते हुए भाग रही थीं। पीछे दो युवक थे। एक ठोकर खाकर गिर पड़ी।  मैंने संभाला। वो अंग्रेजी में कुछ बोल रही थीं। मुझे समझ में नहीं आया, लेकिन इतना पता चल गया कि वे मुसीबत में हैं। सोचने का वक्त नहीं था। मैंने पत्थर उठा लिए। बदमाशों पर फेंककर उन्हें भगा दिया। बाद में साथियों को फोन कर दोनों को पकड़ा और पुलिस के हवाले कर दिया।

द पावर ऑफ ए कॉमन मैन, विदेशी लड़कियों के लिए मजदूर अकेले ही लड़ गया
सतीशचंद्र शर्मा, कंडक्टर
जिन्होंने 3 जनवरी 2013 को वोल्वो में यात्रा कर रही महिला से छेड़छाड़ कर रहे बदमाश को पुलिस के हवाले करके ही दम लिया। 
वोल्वो में यात्रा कर रही महिला ने जब बताया कि एक युवक उसे परेशान कर रहा है तो मैंने तय कर लिया था कि उसे सबक सिखाना ही है। उसने रास्ते में भागने की कोशिश भी की लेकिन मैंने उसे अपने पास जबरन बिठाए रखा। जोधपुर पहुंचते ही उसे पुलिस के हवाले कर दिया। 

द पावर ऑफ ए कॉमन मैन, विदेशी लड़कियों के लिए मजदूर अकेले ही लड़ गया

लक्ष्मण चौधरी, टैंकर ड्राइवर
जब 29 अक्टूबर 2011 को पेट्रोल से भरा जलता टैंकर आबादी क्षेत्र से दूर ले गए थे। जान पर खेलकर कई जिंदगियां बचाई।
टैंकर में 12 हजार लीटर पेट्रोल भरा हुआ था। सोचने का वक्त लेने का मतलब था कई जिंदगियों को खतरे में डाल देता। ड्राइविंग सीट संभालने का फैसला किया। मेरी कोशिश थी कि किसी की जान नहीं जाए। ईश्वर ने मेरी कोशिश कामयाब की। मुझे यही सिखाया भी गया था। sabhar : bhsakar.com



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