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बेजुबान जानवर की इस भावुकता ने इंसानों की आंखों में छलकाए आंसू लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
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रविवार, 16 फ़रवरी 2014

बेजुबान जानवर की इस भावुकता ने इंसानों की आंखों में छलकाए आंसू

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बेजुबान जानवर की इस भावुकता ने इंसानों की आंखों में छलकाए आंसू
जानवर भी इंसान की तरह प्यार की भाषा समझते हैं और भावनात्मक रूप से गहरा जुड़ाव रखते हैं। मनुष्य का प्यार जब जानवरों को मिलता है,तो वे भी इंसानों को अपने दिल के बेहद करीब मानते हैं। यह दृश्य कांगो रिपब्लिक के चिंपोंगा चिम्पांजी रिहैबिलिटेशन सेंटर का है। इस सेंटर में एक साल से मादा चिम्पांजी वाउंडा की देखभाल की जा रही थी।
वाउंडा के स्वस्थ होने के बाद जब उसे जंगल वापस ले जाया जा रहा था, तो वह इतनी भावुक हुई कि देखभाल करने वाली संस्था की प्रमुख डॉक्टर जेन गुडाल को अपनी बाहों में भर लिया। उसे एक साल पहले रिहैबिलिटेशन सेंटर में लाया गया था। अच्छी नर्सिंग केचलते वह स्वस्थ हो गई और इसके बाद उसे जंगल में छोड़ दिया गया । यह स्टोरी कांगो रिपब्लिक के जेन गुडाल इंस्टिट्यूट पर बनी एक डाक्यूमेंट्री में सामने आई है। इस संस्थान में 160 से अधिक चिम्पांजी की देखभाल की जा रही है।
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वाउंडा को रिहैबिलिटेशन सेंटर में नर्सिंग के साथ ही इंसानों का भरपूर प्यार मिला। वाउंडा को मरणासन्न हालत में एक साल पहले जब सेंटर लाया गया था, उसे कई बीमारियां थीं और उसका वजन बहुत कम था। यहां उसका इलाज किया गया। हर दिन उसे एक लीटर दूध दिया जाने लगा। अच्छी देखभाल से वह जल्द ही ठीक होने लगी।

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डॉक्टर जेन गुडाल 20 वर्ष पहले कांगो आई थीं। उन्होंने कांगो सरकार की मदद से चिम्पांजियों के संरक्षण के लिए एक सैंक्चुअरी की स्थापना की। इसका नाम चिंपोंगा चिम्पांची रिहैबिलिटेशन सैंक्चुअरी है। आज उनके प्रयासों के चलते कांगो की इस सैंक्चुअरी में सैकड़ों चिम्पांजी आबाद हैं।
चिम्पांजी सैंक्चुअरी टिचिंडजुलू द्वीप में स्थित है। यहां बहुत ही घने जंगल हैं। इसके पास कांगो की दूसरी सबसे बड़ी नदी कोउलोउ बहती है।
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डॉक्टर जेन गुडाल और डॉक्टर रेबेका एटेंसिया चिम्पांजी वाउंडा को रिहैबिलिटेशन से टिचिंडजुलू द्वीप में स्थित सैंक्चुअरी में भेजने से पहले इस योजना पर आपस में विचार-विमर्श करती हुईं।
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वाउंडा को एक वाहन पर रखे पिंजड़े के अंदर बिठाया गया और टिचिंडजुलू सैंक्चुअरी के लिए रवाना किया गया। उसे टिचिंडजुलू सैंक्चुअरी में इसलिए भेजा गया, ताकि वहां उसकी जिंदगी में इंसानों का दखल नहीं हो। इस दौरान उसके साथ पुनर्वास केंद्र जेनगुडाल संस्थान - कांगो की प्रमुख और डॉक्टर रेबेका एटेंसिया भी थीं।

बेजुबान जानवर की इस भावुकता ने इंसानों की आंखों में छलकाए आंसू
डॉक्टर जेन गुडाल पिंजड़े के अंदर बैठी वाउंडा को देखते हुए भावुक हो रहीं थीं। वाउंडा के बाहर निकले हाथ को स्पर्श करती हुईं डॉ.जेन।

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रिहैबिलिटेशन सेंटर की टीम ने टिचिंडजुलू द्वीप में पहुंचने के लिए एक नाव का भी सहारा लिया। टीम के सदस्यों ने इस आयलैंड के पास बह रह कोउलोउ को नदी इस तरह पार किया। नाव में पिंजड़ा भी रखा गया, जिसके अंदर मादा चिम्पांजी वाउंडा है। नाव पर डॉ. जेन गुडाल और डॉक्टर रेबेका एटेंसिया भी दिखाई दे रहीं हैं।


बेजुबान जानवर की इस भावुकता ने इंसानों की आंखों में छलकाए आंसू
टिचिंडजुलू द्वीप में स्थित सैंक्चुअरी में पिंजड़े से बाहर आने के बाद वाउंडा जब जाने लगी तो डॉ. जेन गुडाल और डॉक्टर रेबेका एटेंसिया भावुक हो गईं। वे उसे जाते हुए देख रहीं हैं।

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टिचिंडजुलू द्वीप में स्थित चिम्पांजी सैंक्चुअरी में वाउंडा अपने पुराने समूह के सदस्यों के बीच पहुंची तो इस तरह कुछ आराम करने लगी।
sabhar : bhaskar.com





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