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शनिवार, 5 अगस्त 2023

UP News : गिफ्ट डीड में केवल आवासीय-कृषि भूमि, फर्म, कंपनी या ट्रस्ट को नहीं मिलेगी पांच हजार में प्रापर्टी

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UP News : गिफ्ट डीड में केवल आवासीय-कृषि भूमि, फर्म, कंपनी या ट्रस्ट को नहीं मिलेगी पांच हजार में प्रापर्टी 

पांच हजार रुपये में संपत्ति का हस्तांतरण केवल रक्त संबंधों में ही मान्य होगा। संस्था, कंपनी, ट्रस्ट आदि पर गिफ्ट डीड लागू नहीं होगी। इसके तहत केवल आवासीय और कृषि संपत्ति को ही दान में दिया जा सकेगा।

पांच हजार रुपये में संपत्ति का हस्तांतरण केवल रक्त संबंधों में ही मान्य होगा। संस्था, कंपनी, ट्रस्ट आदि पर गिफ्ट डीड लागू नहीं होगी। इसके तहत केवल आवासीय और कृषि संपत्ति को ही दान में दिया जा सकेगा। औद्योगिक, व्यवसायिक और संस्थागत संपत्ति इसके दायरे से बाहर रहेंगी। गुरुवार को इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया गया।

स्टांप एवं पंजीयन में प्रमुख सचिव लीना जौहरी द्वारा जारी शासनादेश में कहा गया है कि पांच हजार रुपये में गिफ्ट डीड के तहत संपत्ति का हस्तांतरण केवल पुत्र, पुत्री, पिता, माता, पति, पत्नी, पुत्रवधू, सगा भाई, सगे भाई के मृतक होने की स्थिति में उनकी पत्नी, सगी बहन, दामाद और पुत्र-पुत्री के बेटा-बेटी को ही किया जा सकता है।

शासनादेश के मुताबिक दान में मिली संपत्ति रजिस्ट्री की तारीख से पांच साल के अंदर उपहार में दी गई तो ये नियम लागू नहीं होगा। यानी पांच साल तक संपत्ति का हस्तांतरण नहीं किया जा सकेगा। गिफ्ट डीड के तहत व्यक्ति से व्यक्ति को संपत्ति का हस्तांतरण किया जाएगा। फर्म, कंपनी, ट्रस्ट या संस्था इसके दायरे में नहीं आएंगे। sabhar https://www.amarujala.com

गिफ्ट डीड में केवल आवासीय-कृषि भूमि, फर्म, कंपनी या ट्रस्ट को नहीं मिलेगी पांच हजार में प्रापर्टी

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Bharatnet package को कैबिनेट से मंजूरी, फर्स्ट फेज में होगा 1.3 ट्रिलियन रुपये का निवेश

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Bharatnet package को कैबिनेट से मंजूरी, फर्स्ट फेज में होगा 1.3 ट्रिलियन रुपये का निवेश 

भारतनेट पैकेज (Bharatnet package) को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शनिवार को मंजूरी दे दी है. दूरसंचार विभाग (DoT) के एक शीर्ष अधिकारी ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि सरकार की महत्वाकांक्षी भारतनेट प्रोजेक्ट (Bharatnet Project) के अगले फेज को आगे बढ़ाने के लिए 1.3 ट्रिलियन ($ 17 बिलियन) का निवेश किया जाएगा. बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर के मुताबिक, भारतनेट (Bharatnet) का मकसद हर भारतीय गांव को फिक्स्ड-लाइन ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी (fixed-line broadband connectivity) उपलब्ध करना है.

भारतनेट का मकसद


खबर के मुताबिक, कैबिनेट मीटिंग में भारतनेट (Bharatnet) के नेक्स्ट फेज को आगे बढ़ाने के लिए एक नए ऑपरेशन मॉडल को भी अपनाया गया, जिसका मकसद अगले दो महीनों के भीतर देश भर में 250,000 ग्राम पंचायतों के तहत 674,000 गांवों को कवर करना है. बता दें, अगस्त 2020 में, सरकार ने देश के हर गांव को इंटरनेट की कम से कम 100 एमबीपीएस बैंडविड्थ उपलब्ध करने के लिए ऑप्टिकल फाइबर केबल के जरिये जोड़ने की अनाउंसमेंट की थी. फिलहाल 194,000 गांव अभी तक बिछाई गई 584,000 किमी फाइबर ऑप्टिक केबल से जुड़े हैं.



ग्राम पंचायतों को जोड़ने का मॉडल


भारतनेट (Bharatnet package) ग्राम पंचायतों को राज्य-आधारित मॉडल, निजी क्षेत्र मॉडल और सीपीएसयू मॉडल जैसे कई मॉडल के जरिये जोड़ता है. अगले फेज में इसे अब एक ऐसा सिस्टम द्वारा सेटअप किया जाएगा जहां व्यक्तिगत घरों में केबल बिछाने और उनके रखरखाव के लिए हर गांव में ग्रामीण उद्यमियों (जिन्हें उद्यमी कहा जाता है) को चुना जाएगा.


खबर के मुताबिक, ऑप्टिकल फाइबर केबल (optical fiber cable) को ग्रामीण स्तर तक लाने की पूंजीगत लागत सरकार द्वारा वहन की जाएगी, लेकिन उद्यमी इसे आगे बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होगा. भारतनेट (Bharatnet)  के जरिये ग्रामीण भारत में ई-गवर्नेंस (e-governance), ई-स्वास्थ्य, ई-शिक्षा, ई-बैंकिंग, इंटरनेट और दूसरी सर्विस के डिस्ट्रीब्यूशन को आसान बनाना है. Sabhar https://www.abplive.com

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Modi Surname Case: 'जज साहब को मालूम है...' राहुल गांधी की सजा पर 'सुप्रीम' रोक के बाद सामने आया कपिल सिब्बल का पहला बयान

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 Delhi News: पीएम नरेंद्र मोदी सरनेम मामले में चार जुलाई को सुप्रीम कोर्ट द्वारा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) की सजा पर रोक लगने के बाद राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल (Kapil sibal) ने लोकसभा स्पीकर को नेक सलाह दी है. उन्होंने कहा है कि मोदी सरनेम का मामला एक राजनीतिक एजेंडा है. इस मामले को कानूनी प्रक्रिया में लाना अदालतों का दुरुपयोग है. राहुल गांधी ने मोदी सरनेम को लेकर भाषण कर्नाटक में दिया था. जबकि याचिका गुजरात में दायर की गई. यहां तक की न्यायाधीश को भी पता था कि यदि सजा दो साल से कम होती तो उनकी लोकसभा सदस्यता समाप्त नहीं होती. 

इस मसले पर कपिल सिब्बल ने स्पीकर साबह से कहा है कि सोमवार को राहुल गांधी की सदस्यता बहाल कर देनी चाहिए. अदालतों का दुरुपयोग केवल राहुल गांधी के केस में नहीं हो रहा है. अभी तक ऐसा कई मामले में हो चुका है. सपा नेता आजम खान का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके मामले में भी यही हुआ. कोर्ट का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए. क्रिमिनल डिफेमेशन खत्म होना चाहिए. किसी को जेल में भेजने का कोई मतलब नहीं है. 

सरनेम सियासी मसला


कपिल सिब्ब्ल का कहना है कि यह एक राजनीतिक मसला है. जज साहब ने भी सजा दो साल का दिया. अगर एक दिन भी कम की सजा देते तो राहुल गांधी की सदस्यता समाप्त नहीं होती, पर उन्होंने वैसा नहीं किया. दरअसल, याचिका डालने वाले कोर्ट के जरिए सियासी लाभ उठाना चाहते हैं, ताकि प्रभावी नेताओं को अदालती चक्कर में उलझाकर में बिजी रखा जा सके. साथ ही इसका चुनावी फायदा उठाना संभव हो सके. बता दें कि दो दिन पहले कपिल सिब्बल ने हरियाणा के नूंह हिंसा मसले पर हिंदूवादी संगठनों के नेताओं पर तंज कसा था. उन्होंने कहा था कि नूंह हिंसा को लेकर सभी को ​विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल से सवाल पूछने की जरूरत है? उन्होंने पूछा है कि क्या विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल सांप्रदायिक हिंसा के एक समान फैक्टर हैं? बीजेपी के शीर्ष अधिकारी सांप्रदायिक नरसंहार के ऐसे कृत्यों पर चुप क्यों रहते हैं? आखिरी सवाल यह पूछा था कि इससे किसका लाभ होता है? Modi Surname Case: 'जज साहब को मालूम है...' राहुल गांधी की सजा पर 'सुप्रीम' रोक के बाद सामने आया कपिल सिब्बल का पहला बयान. Sabhar www.abplive.com

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Yellow Foods खाने से नहीं आएगा हार्ट अटैक, जानें दिल के लिए क्यों है फायदेमंद?

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Sat. Aug 5th, 2023 13:22:42
    Yellow Foods खाने से नहीं आएगा हार्ट अटैक, जानें दिल के लिए क्यों है फायदेमंद?

    दिल हमारे शरीर का एक बेहद अहम अंग है, ये जिंदगी की शुरुआत से लेकर आखिरी सांस तक धड़कता रहता है. अगर इसका ख्याल न रखा गया तो हार्ट अटैक (Heart Attack) कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary Artery Disease) और ट्रिपल वेसल डिजीज (Triple Vessel Disease) जैसी खतरनाक और जानलेवा बीमारियों का खतरा बना रहता है. ऐसे में जरूरी है कि हम अपने डेली डाइट से ऑयली फूड्स को बाहर कर दें और सिर्फ हेल्दी चीजें ही खाएं. ग्रेटर नोएडा के GIMS अस्पताल में कार्यरत मशहूर डाइटीशियन आयुषी यादव (Ayushi Yadav) के मुताबिक कुछ पीले फल और सब्जियां खाने से दिल की सेहत को बेहतर किया जा सकता है.

    इन पीले फूड्स खाने से हार्ट अटैक से होगा बचाव

    1. आम (Mango)
    आम का नाम सुनते ही मुंह में स्वाद आ जाता है, हम गर्मी के मौसम का इसलिए इंतजार करते हैं ताकि इस मीठे और लजीज फल का लुत्फ उठा सकें, इस बात भी जान लें कि ये दिल की सेहत के लिए अच्छा है.

    2. नींबू (Lemon)
    नींबू औषधीय गुणों से भरपूर फूड है, जिसका इस्तेमाल सलाद से लेकर नींबू पानी तक में किया जाता है ये दिल की सेहत को बेहतर करने के साथ-साथ वजन कम करने में भी मदद करता है.

    3. केला (Banana)
    हम में से शायद है कोई ऐसा होगा जिसने कभी केला न खाया है, इसका सेवन जितना आसान है उसके फायदे में उतने ज्यादा है. सीमित मात्रा में केला खाने से वजन कम होता है और दिल की सेहत को फायदा मिलता है

    4. अनानास (Pineapple)
    अनानास की मिठास भला किसी अपनी तरफ आकर्षित नहीं करती, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे खाने से हार्ट अटैक का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है. हलांकि इस हद से ज्यादा नहीं खाना चाहिए क्योंकि इससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ने लगता है.

    5. पीली शिमला मिर्च (Bell Pepper)
    इस फूड में फाइबर, आयरन और फोलेट की भरपूर मात्रा पाई जाती है, इससे शरीर को काफी एनर्जी मिलती है और साथ ही बॉडी में ब्लड की कोई कमी नहीं रहती और दिल भी सेहतमंद रहता है.

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    शुक्रवार, 4 अगस्त 2023

    Exclusive: फूलपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं नीतीश कुमार, जेडीयू के सर्वे में हुए फर्स्ट डिवीजन पास

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     बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अभी भले ही विपक्षी पार्टियों के गठबंधन इंडिया के संयोजक न बन सके हों, लेकिन उनकी पार्टी जनता दल युनाइटेड ने उन्हें 2024 के चुनाव में पीएम फेस के तौर पर पेश करने की रणनीति पर अमल करना शुरू कर दिया है. इसके तहत पार्टी के रणनीतिकारों ने नीतीश कुमार को यूपी की उस फूलपुर सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ाने का मन बनाया है, जहां से देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू सांसद हुआ करते थे. जेडीयू ने उनके चुनाव लड़ने के लिए फूलपुर सीट पर न सिर्फ कई स्तर पर सर्वे कराया है, बल्कि पार्टी के एक सांसद, एमएलसी और बिहार के मंत्री को यहां सियासी ज़मीन तैयार करने की ज़िम्मेदारी भी दी गई है.

    जेडीयू के सर्वे के जो नतीजे आए हैं, उससे जेडीयू खासी उत्साहित है. नीतीश की पार्टी के कई दिग्गज नेताओं ने ABP NEWS से हुई बातचीत में उनके फूलपुर से चुनाव लड़ने को लेकर हो रहे सियासी मंथन को खुले तौर पर कबूल भी किया है. नीतीश कुमार फूलपुर सीट से चुनाव लड़कर न सिर्फ खुद को विपक्ष का सबसे मजबूत चेहरा साबित कर सकेंगे, बल्कि वह पीएम मोदी को सीधी टक्कर देने की भी जुगत में रहेंगे. विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक़ इंटरनल सर्वे में यह बात सामने आई है कि नीतीश कुमार के फूलपुर से चुनाव लड़ने पर विपक्ष को दो दर्जन से ज़्यादा सीटों पर सीधा फायदा होगा, जबकि यूपी समेत उत्तर भारत की तमाम सीटों पर इसका असर देखने को मिलेगा. 



    जेडीयू ने फूलपुर सीट पर कराया सर्वे



    ऐसे में कहा जा सकता है कि अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक़ हुआ तो नीतीश कुमार 2024 के चुनाव में बिहार की नालंदा के साथ ही यूपी की फूलपुर सीट से भी ताल ठोंकते हुए नज़र आ सकते हैं. इस सीट पर नीतीश कुमार के सजातीय कुर्मी वोटर निर्णायक भूमिका में होते हैं. यहां अब तक नौ बार कुर्मी प्रत्याशी सांसद चुने गए हैं. पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह भी फूलपुर सीट से सांसद रह चुके हैं. सियासी जानकारों के मुताबिक़ अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दलों को नीतीश को फूलपुर में समर्थन करने में कोई गुरेज भी नहीं होगा.  



    नीतीश कुमार के यूपी की फूलपुर सीट से चुनाव लड़ने की संभावनाओं को लेकर सबसे पहले ABP News चैनल ने ही पिछले साल 17 सितम्बर को Exclusive खबर दिखाई थी. नीतीश की पार्टी जनता दल युनाइटेड इस दौरान लगातार यहां इंटरनल सर्वे कर फीडबैक लेती रही है. फूलपुर में सियासी संभावनाएं तलाशने का ज़िम्मा बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार, नालंदा के सांसद कौशलेंद्र कुमार और नीतीश कुमार के बेहद करीबी एमएलसी संजय सिंह को दिया गया. जेडीयू ने मंत्री श्रवण कुमार को यूपी का प्रभारी भी बनाया हुआ है. 



    फूलपुर से चुनाव लड़े नीतीश कुमार तो होगा फायदा



    श्रवण कुमार ने अब तक यूपी के जिन जिलों में पार्टी के सम्मेलन किये हैं, उनमें से ज़्यादातर फूलपुर सीट के आसपास के ही जिले हैं. श्रवण कुमार ने एबीपी न्यूज से फोन पर की गई बातचीत में बताया कि प्रयागराज जिले में अभी उन्होंने पार्टी का कार्यकर्ता सम्मेलन नहीं किया है, लेकिन वह पिछले दिनों फूलपुर गए ज़रूर हैं. उनके मुताबिक़ फूलपुर में तमाम लोगों ने उनसे नीतीश कुमार को यहां से चुनाव लड़ाने की बात कही. श्रवण कुमार के मुताबिक इस बारे में अंतिम फैसला खुद नीतीश कुमार को ही लेना है. उन्होंने यह भी बताया कि वह जल्द ही फिर से प्रयागराज जाने वाले हैं.  



    फूलपुर में सर्वे कराने की ज़िम्मेदारी नीतीश के करीबी एमएलसी संजय सिंह को दी गई है. फोन पर बातचीत में संजय सिंह ने माना कि पार्टी तमाम संभावनाओं पर काम कर रही है. कई जगहों पर लोगों की राय ली गई है. लोग अगर चाहते हैं कि नीतीश कुमार फूलपुर से चुनाव लड़ें तो इस पर विचार ज़रूर होगा. संजय सिंह के मुताबिक़ यूपी की कई दूसरी सीटों से भी नीतीश कुमार के लिए डिमांड आई है. सांसद कौशलेन्द्र कुमार ने भी यहां के तमाम लोगों से फोन पर बातचीत कर फीडबैक लिया है. वो दिल्ली में भी यूपी की सियासत से जुड़े कई लोगों से मुलाकात कर चुके हैं. जेडीयू की युवा इकाई के राष्ट्रीय सचिव नीरज पटेल भी कई बार फूलपुर का दौरा कर लोगों का मन टटोल चुके हैं. सूत्रों के मुताबिक़ इन सभी नेताओं को फूलपुर से उम्मीद से बेहतर रिस्पांस मिला है.  



    बीजेपी के खिलाफ मोर्चेबंदी होगी आसान

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    होम राज्य उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड Exclusive: फूलपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं नीतीश कुमार, जेडीयू के सर्वे में हुए फर्स्ट डिवीजन पास

    Exclusive: फूलपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं नीतीश कुमार, जेडीयू के सर्वे में हुए फर्स्ट डिवीजन पास


    मोहम्मद मोईन

    Updated at: 02 Aug 2023 11:02 AM (IST)

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    UP Politics: जेडीयू ने नीतीश कुमार के फूलपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए कई स्तर पर सर्वे कराया. इस सर्वे में सामने आया है कि अगर नीतीश यहां से चुनाव लड़ते हैं तो कई सीटों पर विपक्ष को फायदा होगा.

    Exclusive: फूलपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं नीतीश कुमार, जेडीयू के सर्वे में हुए फर्स्ट डिवीजन पास


    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ( Image Source : PTI )


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    Lok Sabha Election 2024: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अभी भले ही विपक्षी पार्टियों के गठबंधन इंडिया के संयोजक न बन सके हों, लेकिन उनकी पार्टी जनता दल युनाइटेड ने उन्हें 2024 के चुनाव में पीएम फेस के तौर पर पेश करने की रणनीति पर अमल करना शुरू कर दिया है. इसके तहत पार्टी के रणनीतिकारों ने नीतीश कुमार को यूपी की उस फूलपुर सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ाने का मन बनाया है, जहां से देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू सांसद हुआ करते थे. जेडीयू ने उनके चुनाव लड़ने के लिए फूलपुर सीट पर न सिर्फ कई स्तर पर सर्वे कराया है, बल्कि पार्टी के एक सांसद, एमएलसी और बिहार के मंत्री को यहां सियासी ज़मीन तैयार करने की ज़िम्मेदारी भी दी गई है.




    जेडीयू के सर्वे के जो नतीजे आए हैं, उससे जेडीयू खासी उत्साहित है. नीतीश की पार्टी के कई दिग्गज नेताओं ने ABP NEWS से हुई बातचीत में उनके फूलपुर से चुनाव लड़ने को लेकर हो रहे सियासी मंथन को खुले तौर पर कबूल भी किया है. नीतीश कुमार फूलपुर सीट से चुनाव लड़कर न सिर्फ खुद को विपक्ष का सबसे मजबूत चेहरा साबित कर सकेंगे, बल्कि वह पीएम मोदी को सीधी टक्कर देने की भी जुगत में रहेंगे. विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक़ इंटरनल सर्वे में यह बात सामने आई है कि नीतीश कुमार के फूलपुर से चुनाव लड़ने पर विपक्ष को दो दर्जन से ज़्यादा सीटों पर सीधा फायदा होगा, जबकि यूपी समेत उत्तर भारत की तमाम सीटों पर इसका असर देखने को मिलेगा. 



    जेडीयू ने फूलपुर सीट पर कराया सर्वे



    ऐसे में कहा जा सकता है कि अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक़ हुआ तो नीतीश कुमार 2024 के चुनाव में बिहार की नालंदा के साथ ही यूपी की फूलपुर सीट से भी ताल ठोंकते हुए नज़र आ सकते हैं. इस सीट पर नीतीश कुमार के सजातीय कुर्मी वोटर निर्णायक भूमिका में होते हैं. यहां अब तक नौ बार कुर्मी प्रत्याशी सांसद चुने गए हैं. पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह भी फूलपुर सीट से सांसद रह चुके हैं. सियासी जानकारों के मुताबिक़ अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दलों को नीतीश को फूलपुर में समर्थन करने में कोई गुरेज भी नहीं होगा.  



    नीतीश कुमार के यूपी की फूलपुर सीट से चुनाव लड़ने की संभावनाओं को लेकर सबसे पहले ABP News चैनल ने ही पिछले साल 17 सितम्बर को Exclusive खबर दिखाई थी. नीतीश की पार्टी जनता दल युनाइटेड इस दौरान लगातार यहां इंटरनल सर्वे कर फीडबैक लेती रही है. फूलपुर में सियासी संभावनाएं तलाशने का ज़िम्मा बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार, नालंदा के सांसद कौशलेंद्र कुमार और नीतीश कुमार के बेहद करीबी एमएलसी संजय सिंह को दिया गया. जेडीयू ने मंत्री श्रवण कुमार को यूपी का प्रभारी भी बनाया हुआ है. 



    फूलपुर से चुनाव लड़े नीतीश कुमार तो होगा फायदा



    श्रवण कुमार ने अब तक यूपी के जिन जिलों में पार्टी के सम्मेलन किये हैं, उनमें से ज़्यादातर फूलपुर सीट के आसपास के ही जिले हैं. श्रवण कुमार ने एबीपी न्यूज से फोन पर की गई बातचीत में बताया कि प्रयागराज जिले में अभी उन्होंने पार्टी का कार्यकर्ता सम्मेलन नहीं किया है, लेकिन वह पिछले दिनों फूलपुर गए ज़रूर हैं. उनके मुताबिक़ फूलपुर में तमाम लोगों ने उनसे नीतीश कुमार को यहां से चुनाव लड़ाने की बात कही. श्रवण कुमार के मुताबिक इस बारे में अंतिम फैसला खुद नीतीश कुमार को ही लेना है. उन्होंने यह भी बताया कि वह जल्द ही फिर से प्रयागराज जाने वाले हैं.  



    फूलपुर में सर्वे कराने की ज़िम्मेदारी नीतीश के करीबी एमएलसी संजय सिंह को दी गई है. फोन पर बातचीत में संजय सिंह ने माना कि पार्टी तमाम संभावनाओं पर काम कर रही है. कई जगहों पर लोगों की राय ली गई है. लोग अगर चाहते हैं कि नीतीश कुमार फूलपुर से चुनाव लड़ें तो इस पर विचार ज़रूर होगा. संजय सिंह के मुताबिक़ यूपी की कई दूसरी सीटों से भी नीतीश कुमार के लिए डिमांड आई है. सांसद कौशलेन्द्र कुमार ने भी यहां के तमाम लोगों से फोन पर बातचीत कर फीडबैक लिया है. वो दिल्ली में भी यूपी की सियासत से जुड़े कई लोगों से मुलाकात कर चुके हैं. जेडीयू की युवा इकाई के राष्ट्रीय सचिव नीरज पटेल भी कई बार फूलपुर का दौरा कर लोगों का मन टटोल चुके हैं. सूत्रों के मुताबिक़ इन सभी नेताओं को फूलपुर से उम्मीद से बेहतर रिस्पांस मिला है.  



    बीजेपी के खिलाफ मोर्चेबंदी होगी आसान



    दरअसल, फूलपुर सीट से चुनाव लड़कर नीतीश कुमार एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश करेंगे. यहां से चुनावी समर में कूदने का दांव नीतीश कुमार और उनकी टीम की सियासी रणनीति का वह हिस्सा है, जिसके ज़रिये वह विपक्ष को एकजुट करने के साथ ही बीजेपी को घेरने का भी काम करेंगे. नीतीश कुमार को यह अच्छे से पता है कि दिल्ली का रास्ता यूपी से होकर ही जाता है. ऐसे में अगर बीजेपी के खिलाफ यूपी में ही मोर्चेबंदी कर दी जाए तो उसे हराने की कोशिश कुछ आसान हो सकती है. कुल मिलाकर ये दांव 2024 की लड़ाई को मोदी बनाम नीतीश बनाने के प्रयासों का होगा, क्योंकि नीतीश के जिस फूलपुर सीट से किस्मत आजमाने की चर्चा हैं, वहां से पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की दूरी सिर्फ सौ किलोमीटर है.



    राष्ट्रीय नेता बनकर उभरेंगे नीतीश कुमार



    यूपी से चुनाव लड़कर नीतीश कुमार अपने ऊपर लगे बिहार के नेता के ठप्पे से भी छुटकारा पाकर खुद को एक बार फिर से राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित करना चाहेंगे. सूत्रों के मुताबिक नीतीश को यहां से चुनाव लड़ाने का फैसला अनायास ही नहीं, बल्कि खूब सोच-समझकर लिया गया है. दरअसल प्रयागराज को देश में सियासत के बड़े केंद्र के तौर पर जाना जाता है. पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर लाल बहादुर शास्त्री और वीपी सिंह यहां से सांसद चुने जाने के बाद देश के प्रधानमंत्री बने तो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी-चंद्रशेखर और गुलज़ारी लाल नंदा ने यहीं से सियासत की बारीकियां सीखीं.

    फूलपुर सीट का जातीय समीकरण भी पूरी तरह नीतीश के मुफीद है. यहां कुर्मी वोटर तीन लाख के करीब हैं. इसके साथ ही यादव और मुस्लिम मतदाता भी निर्णायक भूमिका में हैं. यानी फूलपुर से चुनाव लड़कर राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा सियासी संदेश दिया जा सकता है. इस जातीय गणित के सहारे ही फूलपुर सीट से अब तक नौ कुर्मी सांसद चुने गए हैं. मौजूदा समय में भी यहां से कुर्मी समुदाय की बीजेपी नेता केशरी देवी पटेल ही सांसद हैं. अकेले फूलपुर ही नहीं बल्कि आस-पास की तकरीबन दो दर्जन सीटों पर कुर्मी वोटर मजबूत स्थिति में हैं.



    नीतीश के आने से दो दर्जन सीटों पर फायदा



    अभी यहां के ज़्यादातर कुर्मी बीजेपी और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की पार्टी अपना दल एस गठबंधन के साथ हैं, लेकिन नीतीश के फूलपुर से चुनाव लड़ने पर सिर्फ इन दो दर्जन सीटों पर ही नहीं बल्कि समूचे यूपी में असर पड़ सकता है. फूलपुर सीट यूपी के उस पूर्वांचल हिस्से से आती है, जो बिहार से सटा हुआ है. इन सबसे अलग नीतीश की कोशिश राष्ट्रीय स्तर पर सियासी लड़ाई को काशी बनाम प्रयाग बनाने की होगी. वाराणसी से पीएम मोदी चुनाव लड़ते हैं तो नीतीश कई पूर्व प्रधानमंत्रियों के जुड़ाव वाली प्रयागराज की फूलपुर सीट से खुद को पीएम मेटेरियल के तौर पर पेश करना चाहेंगे. दरअसल पीएम फेस को लेकर विपक्ष में भले ही खींचतान हो, लेकिन तकरीबन दो तिहाई विपक्षी वोटों को एकजुट कर बीजेपी को हराने की कोशिश तमाम बड़े दल करना चाहते हैं. 



    फूलपुर में विधानसभा की पांच सीटें हैं. इनमे से सोरांव और फूलपुर में कुर्मी वोटर ही पिछड़ों में सबसे ज़्यादा हैं. फाफामऊ और इलाहाबाद पश्चिमी सीट पर भी कुर्मियों की संख्या निर्णायक है. इलाहाबाद उत्तरी में संख्या औसत है. 2022 के विधानसभा चुनाव में इन पांच विधानसभा सीटों में से चार पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी, जबकि सोरांव सीट से सपा की गीता पासी चुनाव जीती थीं. हालांकि बाकी चारों सीटों पर सपा मजबूती से लड़ी थी. नीतीश कुमार साल 2016 में फूलपुर में किसानों का एक बड़ा कार्यक्रम कर चुके हैं. प्रयागराज में नार्थ सेंट्रल रेलवे ज़ोन का हेडक्वार्टर बनाने का श्रेय भी नीतीश कुमार को ही जाता है. नीतीश उस वक़्त रेल मंत्री हुआ करते थे. Sabhar https://www.abplive.com

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