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गुरुवार, 19 जनवरी 2012

धरती का विनाश से सामना !

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वाशिंगटन। धरती छठी बार विनाश का सामना करने वाली है। हालांकि पिछले पांच बार के मुकाबले इस बार के प्रलय की तीव्रता बहुत कम होगी। "नेचर" जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में कैलीफोर्निया, बर्कले विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने इस बात का मूल्यांकन किया कि स्तनधारी और अन्य प्रजातियां संभावित विलुप्ति के मामले में 54 करोड़ वर्ष पहले की तुलना में आज किस स्थिति में हैं। वैज्ञानिकों ने उम्मीद की वजहों के साथ-साथ खतरे के कारणों को भी पाया।कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रो. एंटनी बार्नोस्की ने कहा, अगर आप विलुप्त होने के कगार पर पहंुचे स्तनधारियों को ही केवल देखें। वे 1,000 वर्षों में लुप्त हो जाएंगे और यह हमें बताता है कि हम सर्वनाश की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा, खतरे में पड़ी प्रजाति विलुप्त हो जाए और विलुप्त होने की यह दर जारी रही तो छठा सर्वनाश 3 से 22 शताब्दियों के बीच में आ सकता है।
भारत का वर्चस्व
भारत के शीर्ष वैज्ञानिक संगठन और नासा द्वारा प्रायोजित एक संयुक्त अनुसंधान और कोलकाता के एक वैज्ञानिक ने सूर्य के 11 वर्षीय चक्र के दौरान सौर गतिविधियों में कमी आने की पहेली को हल कर लिया है। दुनिया भर के सौर वैज्ञानिक 2008-09 के दौरान सूर्य के धब्बों के लापता होने से चकित थे।  पिछले 100 सालों के दौरान यह सर्वाधिक न्यूनतम सौर गतिविधि थी।
sabhar : patrika.com

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